जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के एक निजी स्कूल की हैंडबुक को लेकर इन दिनों विवाद सामने आया है। आरोप है कि स्कूल की हैंडबुक में छात्रों के तिलक, बिंदी, मेहंदी और सिख छात्रों की पगड़ी पहनकर आने पर रोक से जुड़ा प्रावधान शामिल था। इस बात के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और कई धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि इस तरह के नियम लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
धार्मिक प्रतीकों पर रोक का विरोध
विरोध करने वालों में सनातन धर्म सभा और जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीजीपीसी) भी शामिल हैं। इन संगठनों का कहना है कि तिलक, बिंदी, मेहंदी और पगड़ी केवल पहनावे का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह लोगों की धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ऐसे में किसी भी स्कूल द्वारा इन पर रोक लगाने की कोशिश उचित नहीं मानी जा सकती। सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष चेतरपाल शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र को उसकी धार्मिक पहचान के कारण असहज महसूस नहीं कराया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। साथ ही स्थानीय प्रशासन से इस मामले पर उचित कार्रवाई करने की अपील की गई है।
मामला बढ़ने के बाद स्कूल प्रशासन भी सामने आया। स्कूल के प्रिंसिपल सुजीश मैथ्यू ने कहा कि यदि स्कूल की किसी नीति, नियम या हैंडबुक में लिखी किसी बात से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें इसका खेद है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। प्रिंसिपल ने आश्वासन दिया कि हैंडबुक में मौजूद विवादित प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्कूल प्रबंधन आवश्यक कदम उठाएगा।

















