नई दिल्ली। लोकसभा में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को शोर-शराबे के बीच गुरुवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह विधेयक एक दिन पहले ही राज्यसभा से पारित हुआ था। विधेयक का उद्देश्य वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण और सम्मान प्रदान करना है।
सरकार का कहना है कि यह विधेयक भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणाओं को सशक्त करेगा। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने आज लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया जिसके बाद विधेयक पारित कर दिया गया और कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राय ने कहा कि यह केवल विधायी संशोधन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति देश की प्रतिबद्धता है। जिस प्रकार 1971 के अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रगान को सम्मान मिला, उसी प्रकार वंदे मातरम् को भी समान सम्मान दिया जाना चाहिए।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक
अपने वक्तव्य में उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता, विकसित भारत और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारियों के मुख से भी वंदे मातरम् का उद्घोष गूंजता था।
















