काठमांडू। नेपाल सरकार पर चीन के दबाव का बड़ा असर हुआ है। चीन के दबाव के बाद काठमांडू में आयोजित होने वाले तिब्बत से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दलाई लामा की निर्वासित सरकार अपने आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं भेजेगी। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित मुख्यालय सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने 23 से 29 अगस्त तक काठमांडू में आयोजित होने वाले ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज’ के 17वें सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
चीन ने इस सम्मेलन को लेकर जताई थी चिंता
सीटीए ने इस सम्मेलन में अपने थिंक टैंक ‘तिब्बत नीति संस्थान’ (टीपीआई) से पांच प्रतिनिधियों को भेजने की तैयारी की थी। यह हैं-टीपीआई के निदेशक दावा छिरिंग के नेतृत्व में शोधकर्ता डॉ. छेवांग दोरजी, डॉ. छिरिंग डोल्मा, डॉ. कर्मा तेन्जिंग दलिया और डॉ. रिगमोन छिरिंग सामदुक। वर्तमान में पेनपा छिरिंग सीटीए के प्रमुख हैं। एक उच्च सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, 20 जुलाई को काठमांडू स्थित चीन के राजदूत चांग माओमिंग ने नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राई से मुलाकात में सीटीए के कुछ प्रतिनिधियों के औपचारिक रूप से शामिल होने की बात कहते हुए सम्मेलन को लेकर चिंता जताई थी। राजदूत ने सम्मेलन में चीन-विरोधी बयानबाजी की आशंका जताते हुए चिंता व्यक्त की थी।
नेपाल में पहली बार हो रहा है तिब्बत सम्मेलन
नेपाल में पहली बार ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज’ का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इससे पहले एशिया में जापान (1989) और मंगोलिया (2013) में यह सम्मेलन आयोजित हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि जिस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर चीन इतनी चिंता जता रहा है, उसमें चीन से ही लगभग 100 प्रतिभागी सहभागी हो रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में भाग लेने के लिए पंजीकृत 39 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधियों में सबसे अधिक (लगभग 150) अमेरिका से आ रहे हैं। भागीदारी के मामले में चीन दूसरे स्थान पर है। सम्मेलन में चीन के ल्हासा, सिचुआन, क्विंगहाई और बीजिंग से लेकर अमेरिका के हार्वर्ड व कोलंबिया तथा ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड व कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

















