केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद CJP (कोकरोच जनता पार्टी) ने अपना 36 दिन पुराना आंदोलन खत्म कर दिया। इस आंदोलन में NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्रों की बड़ी भागीदारी थी। लेकिन, अब उनको लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा दावा किया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इंदौर में PTI से बात करते हुए कहा कि प्रधान जी ने आंदोलन के पहले दिन ही इस्तीफा देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन शुरू होते ही प्रधान ने BJP अध्यक्ष को बताया कि अगर पार्टी को लगता है तो वे शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
विजयवर्गीय के अनुसार, BJP अध्यक्ष ने उस समय प्रधान को इस्तीफा न देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है, इसलिए इस मुद्दे पर आगे बात न करें। बाद में जब पार्टी ने फैसला कर लिया तो प्रधान ने तुरंत इस्तीफा दे दिया।
ईमानदारी और लगन से धर्मेंद्र प्रधान ने किया काम
कैलाश विजयवर्गीय ने धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जो भी जिम्मेदारी दी गई, उसे पूरी ईमानदारी और लगन से निभाया। उन्होंने इस्तीफे को लेकर ये भी कहा कि इससे भारत को अस्थिर करने की कुछ बाहरी ताकतों की कोशिश नाकाम हो गई। उन्होंने बांग्लादेश और श्रीलंका में हुए हालात का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधान का इस्तीफा उन प्रयासों को रोकने में मददगार साबित हुआ।
नया जिम्मा कौन संभालेगा?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीनियर BJP नेता प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नये और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे हैं। जोशी ने नई जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि वे इसे कर्तव्य और विनम्रता की भावना से स्वीकार करते हैं। प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच साल में प्रधान जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कई महत्वपूर्ण कामों को आगे बढ़ाया। अब प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वे पूरी लगन से काम करेंगे और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे।












