रांची (झारखंड)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) रांची महानगर के विक्रमादित्य नगर द्वारा सरला बिड़ला विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में एक भव्य “युवा संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में तातीसिलवे और आसपास के क्षेत्रों से आए 1,000 से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा व्यवसायियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की.
कार्यक्रम में विक्रमादित्य नगर के नगर संघचालक शंकर साहू एवं सह संघचालक बृजेश जी की गरिमामयी उपस्थिति रही. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य वी. भागैय्या जी रहे. अपने मुख्य संबोधन में उन्होंने RSS शताब्दी वर्ष, राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान और संघ के मूल दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला.

डॉ. हेडगेवार के संघर्ष और राष्ट्र-समर्पण का स्मरण
संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और संघर्षों का स्मरण करते हुए वी. भागैय्या जी ने कहा कि बाल्यावस्था में ही माता-पिता को खोने और अत्यधिक गरीबी का सामना करने के बावजूद डॉ. हेडगेवार ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया.
डॉ. हेडगेवार का राष्ट्र-समर्पण और RSS की स्थापना:
- वंदे मातरम आंदोलन: कक्षा नौवीं में अध्ययन के दौरान ‘वंदे मातरम’ आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था.
- चिकित्सा शिक्षा व त्याग: कलकत्ता से उत्कृष्ट अंकों के साथ डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बर्मा में सरकारी नौकरी का आकर्षक प्रस्ताव ठुकरा दिया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े.
- संघ की स्थापना (1925): मुगलों और अंग्रेजों द्वारा भारत को गुलाम बनाने के कारणों का गहराई से अध्ययन करते हुए उन्होंने पाया कि राष्ट्रीय चेतना की कमी और सामाजिक विघटन ही इसकी मुख्य वजह थी. इसी सामाजिक एकजुटता के संकल्प के साथ 1925 में RSS की स्थापना हुई.
विविधता में एकता और शहीद भगत सिंह के सपनों का भारत
वी. भागैय्या जी ने कहा कि यद्यपि भारत भाषा, खान-पान, वेशभूषा और पूजा पद्धतियों में विविधताओं से भरा है, लेकिन हमारी मूलभूत पहचान यही है कि हम सभी भारत माता की संतानें हैं. विदेशी शासन के दौरान जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने के प्रयास किए गए, जिन्हें निष्फल करते हुए हमें सामाजिक समरसता को मजबूत करना होगा.

“शहीद भगत सिंह ने न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता की कल्पना की थी, बल्कि एक ऐसे भारत का सपना देखा था जहां हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन मिले, कठोर परिश्रम करने वालों को सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त हो, और किसी भी आधार पर किसी का शोषण न हो।” – वी. भागैय्या जी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, RSS
युवाओं से व्यक्तिगत करियर से आगे बढ़कर राष्ट्र सेवा का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित युवा पीढ़ी से केवल व्यक्तिगत करियर लक्ष्यों तक सीमित न रहकर राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब देश विरोधी वैचारिक चुनौतियां और भ्रामक आख्यान (Misleading Narratives) राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, तब युवाओं को राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए जागरूक और प्रतिबद्ध रहना होगा.
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के गरिमामयी गायन तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.











