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ट्रंप की मनमानी जारी: भारत समेत 80+ देशों पर लगाए नए टैरिफ, 10-12.5% ड्यूटी का ऐलान

ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 80 से ज्यादा देशों पर नए टैरिफ लगा दिए हैं। मजबूर मजदूरी को लेकर लगाए गए 10% से 12.5% टैरिफ शुक्रवार से लागू होंगे। जानें पुराने टैरिफ की कहानी, कानूनी विवाद और भारत पर असर।

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कुलदीप सिंह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानियां हैं कि थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। वह टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी क्रम में उनकी सरकार ने भारत समेत 80 से अधिक देशों पर टैरिफ लगा दिए हैं। ये टैरिफ उस 10 प्रतिशत वाले ग्लोबल ड्यूटी की जगह लेंगे जो शुक्रवार सुबह खत्म होने वाला था। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने गुरुवार देर रात इसे घोषित किया।

नए टैरिफ 10 प्रतिशत या 12.5 प्रतिशत के होंगे। इनमें ब्रिटेन, मैक्सिको, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, भारत, चीन और यूरोपीय यूनियन के 27 देश शामिल हैं। ये टैरिफ फोर्स्ड लेबर (मजबूर मजदूरी) से जुड़ी चिंताओं के आधार पर लगाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि ये धारा 301 ऑफ द ट्रेड एक्ट 1974 के तहत हैं।

पुरानी टैरिफ की कहानी

फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के कई पुराने टैरिफ को गैर-कानूनी बताया था। उसके बाद ट्रंप ने फरवरी में ही 10 प्रतिशत का एक नया ग्लोबल टैरिफ लगाया था। ये 150 दिनों के लिए था, जो अब शुक्रवार को खत्म हो रहा है। अप्रैल में ट्रंप ने “लिबरेशन डे” कहकर इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगाया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि शांतिपूर्ण समय में टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है।

ट्रंप लंबे समय से टैरिफ को अमेरिकी नौकरियां बचाने, ट्रेड डेफिसिट कम करने और “अन्यायपूर्ण” प्रैक्टिस रोकने का तरीका मानते हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि “टैरिफ डिक्शनरी का सबसे सुंदर शब्द है।”

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क्यों लगाए जा रहे हैं नए टैरिफ

नए टैरिफ मजबूर मजदूरी वाले देशों के खिलाफ बताए जा रहे हैं। जेमिसन ग्रीर ने कहा, “यह कदम मानवाधिकार उल्लंघन और व्यापार को सुधारने में मदद करेगा। इससे हर जगह मजदूरों की हालत बेहतर होगी।” कुछ देशों ने मजबूर मजदूरी पर प्रतिबंध सख्त किए, इसलिए उन्हें कम टैरिफ मिला। उदाहरण के लिए, भारत पर शुरू में 12.5 प्रतिशत की बजाय 10 प्रतिशत रखा गया।

कुछ चीजें जैसे तेल, गैस और फर्टिलाइजर इन नए टैरिफ से छूट पा सकती हैं। USMCA (अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा समझौता) के तहत ड्यूटी-फ्री सामान भी प्रभावित नहीं होंगे।

कानूनी सवाल और विरोध

कई विशेषज्ञों का कहना है कि ये टैरिफ भी राष्ट्रपति की सीमा से बाहर हो सकते हैं। पीटरसन इंस्टीट्यूट के एलन वुल्फ ने लिखा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को इतना व्यापक अधिकार नहीं दिया है। अगर कोर्ट में चुनौती दी गई तो सुप्रीम कोर्ट इन्हें भी पलट सकता है। धारा 301 का इस्तेमाल पहले भी विवादास्पद रहा है और बहुत कम हुआ है।

लोगों की राय और असर

हैरिस पोल के सर्वे में (गार्जियन के लिए) पता चला कि 7 में से 10 अमेरिकियों का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ से चीजें महंगी हुई हैं। 72 प्रतिशत लोगों को लगता है कि इनका उपभोक्ताओं पर नकारात्मक असर पड़ा। रिपब्लिकन वोटरों में भी 64 प्रतिशत ने महंगाई मानी और 60 प्रतिशत ने नकारात्मक प्रभाव बताया। ट्रेड चीफ ग्रीर ने सीनेट में कहा कि टैरिफ से कीमतें नहीं बढ़ीं। उन्होंने कोर इन्फ्लेशन 2.6 प्रतिशत बताते हुए सुधार का दावा किया। कुल इन्फ्लेशन बाइडन के समय से थोड़ा ज्यादा है।

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