
जम्मू-कश्मीर में लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। भारी बारिश के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं और सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण हालात सामान्य होने में समय लग सकता है।
सबसे ज्यादा असर राजौरी, पुंछ, रामबन, उधमपुर, रियासी और कठुआ जिलों में देखने को मिला है। उधमपुर और रामबन में भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगह प्रभावित हुआ। वहीं जम्मू-पठानकोट हाईवे पर जलभराव से यातायात बाधित रहा। राजौरी-पुंछ हाईवे भी कुछ घंटों तक बंद रहा, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं। राजौरी और पुंछ में बंद 435 सड़कों में से 356 को दोबारा चालू कर दिया गया है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रदेश की स्थिति की समीक्षा की और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया।
लगातार बारिश के कारण तवी, चिनाब समेत कई नदियां और नाले उफान पर हैं। रियासी में सलाल पनबिजली परियोजना के बैराज खोल दिए गए हैं। वहीं बड़गाम के बीरबाह इलाके में तेज बहाव के कारण एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बह गया और एक व्यक्ति की मौत हो गई। पिछले तीन दिनों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रदेश में कुल 25 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सबसे अधिक मौतें राजौरी और पुंछ जिलों में हुई हैं। खराब मौसम का असर धार्मिक यात्राओं पर भी पड़ा है। लगातार तीसरे दिन श्री अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा और शिवखोड़ी यात्रा स्थगित रही। कटड़ा में करीब 20 हजार श्रद्धालु यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं कई जिलों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और नालों से दूर रहें, बिना जरूरत यात्रा न करें और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।