उदयपुर (राजस्थान)। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के CTAE महाविद्यालय स्थित प्लेसमेंट सभागार में घुमंतू समाज के युवक-युवतियों तथा समाज के वरिष्ठ प्रबुद्धजनों का एक दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
लेकसिटी उदयपुर में अपने प्रकार का यह पहला और ऐतिहासिक सम्मेलन रहा, जिसमें घुमंतू समाज की युवा शक्ति को एक मंच पर लाकर उनके समक्ष मौजूद रोजगार, स्वरोजगार, पारंपरिक व्यवसायों की चुनौतियों, कौशल विकास (Skill Development), नवाचार तथा समाज के समग्र विकास जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक विषयों पर गंभीर मंथन किया गया।
युवाओं और विशेषज्ञों के बीच हुआ सीधा और सहज संवाद
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केवल समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर आत्मविश्वास जगाना और उन्हें आत्मनिर्भरता का व्यावहारिक मार्ग दिखाना था। औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, वक्ताओं और युवाओं ने आपस में अनौपचारिक परिचय व संवाद किया, जिससे एक सहज और सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ।
निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण और टूलकिट की जानकारी:
प्रथम सत्र में ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत संचालित ICICI (RSETI) के प्रतिनिधि कौशलेन्द्र सिंह ने युवाओं को विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आरसेटी द्वारा बेरोजगार युवक-युवतियों को उनकी रुचि के अनुसार पूरी तरह से निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र और रोजगार शुरू करने के लिए टूलकिट भी प्रदान की जाती है।
पशुपालन और उद्यमिता से बनेगा सशक्त भविष्य
सम्मेलन में उद्योगपति हेमंत जैन ने युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों और इसके लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दीपक शुक्ला ने युवाओं को उनकी आंतरिक क्षमता का अहसास कराया।
“प्रत्येक समाज की असली ताकत उसका युवा ही होता है। जिस प्रकार श्री हनुमान जी को जामवंत जी ने उनकी अपरंपार शक्ति का स्मरण कराया था, ठीक उसी तरह आज हमारे घुमंतू समाज के युवाओं को भी अपने भीतर छिपी प्रतिभा और ताकत को पहचान कर राष्ट्र व समाज हित में आगे बढ़ना होगा।” – दीपक शुक्ला, कार्यक्रम अध्यक्ष
वल्लभनगर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. शिव शर्मा ने कहा कि घुमंतू समाज मूलतः एक समृद्ध पशुपालक समाज रहा है। यदि युवा पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करें, तो वे न केवल अपने परिवार का आर्थिक स्तर सुधार सकते हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देने वाले ‘जॉब क्रिएटर’ बन सकते हैं।
ओपन हाउस संवाद और प्रतिभाशाली युवाओं का सम्मान
सम्मेलन के खुले संवाद सत्र में युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, डिजिटल मार्केटिंग, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, आर्थिक विषमताओं और पारंपरिक व्यवसायों के सामने खड़ी चुनौतियों से जुड़े कई तीखे प्रश्न पूछे। पैनल में मौजूद विशेषज्ञों ने युवाओं की सभी शंकाओं का समाधान करते हुए उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया।
इस अवसर पर शिक्षा, कला, खेलकूद, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले घुमंतू समाज के प्रतिभाशाली युवा-युवतियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित व प्रोत्साहित किया गया।
“दो प्रकार के व्यसनों से खुद को बचाएं युवा” : डॉ. पुष्कर लोहार
समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध चित्रकार एवं घुमंतू जाति उत्थान न्यास के डॉ. पुष्कर लोहार ने युवाओं को जीवन में सफलता प्राप्त करने का मूलमंत्र दिया। उन्होंने कहा कि घुमंतू समाज की पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तकला केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है। युवाओं को इन पारंपरिक कौशलों को आधुनिक टेक्नोलॉजी, नए डिजाइन और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़कर वैश्विक स्तर तक ले जाना होगा।
युवाओं के लिए दो प्रमुख चेतावनियाँ:
- पहला नशा (मादक पदार्थ): शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थ, जो व्यक्ति के स्वास्थ्य और पूरे परिवार के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को तबाह कर देते हैं।
- दूसरा नशा (डिजिटल लत): मोबाइल और सोशल मीडिया का अनियंत्रित उपयोग, जो युवाओं की एकाग्रता, बहुमूल्य समय और भविष्य को दीमक की तरह चाट रहा है।
डॉ. लोहार ने जोर देकर कहा कि यदि युवा इन दोनों खतरनाक व्यसनों से स्वयं को पूरी तरह से दूर रख लें, तो उन्हें जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों को छूने से कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने घुमंतू जाति उत्थान न्यास द्वारा चलाए जा रहे छह प्रमुख रचनात्मक प्रकल्पों की जानकारी दी और युवाओं से समाज निर्माण के इन अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।











