विश्व

BIMSTEC का नेता भारत, New Delhi बैठक में NSA Doval ने कहा-खतरे अनेक समाधान एक-सहयोग और समन्वय

एनएसए डोवल का सदस्य देशों से भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आतंकवाद, साइबर खतरों और अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक घनिष्ठ क्षेत्रीय सहयोग की अपील करना चुनौतियों के समाधान का आह्वान करता है

Published by
Alok Goswami

नई दिल्ली में BIMSTEC देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक का भारत द्वारा नेतृत्व किया जाना दिखाता है कि अन्य अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ ही दक्षिण एशिया के इस रणनीतिक महत्व के गुट की अगुआई भी भारत के पास है। भारत की राजधानी में इस बैठक में गुट के सदसरू देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों को संबोधित करते हुए भारत के एनएसए अजीत डोवल का सदस्य देशों से भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आतंकवाद, साइबर खतरों और अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक घनिष्ठ क्षेत्रीय सहयोग की अपील करना चुनौतियों के समाधान का आह्वान करता है। नई दिल्ली में BIMSTEC राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की यह 5वीं बैठक रही, जिसमें डोवल ने साफ कहा कि यह समूह एक ऐसे वैश्विक सुरक्षा वातावरण का सामना कर रहा है जो जटिल से जटिलतम होता जा रहा है और इस दृष्टि से इस पर सबको मिलकर तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

बैठक के शुरू में ही अपनी बात रखते हुए भारत के एनएसए ने कहा कि आज हम एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में मिल रहे हैं। हम अपने सामने संघर्ष और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं देख रहे हैं। इसके साथ ही, तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति के कारण कई प्रकार के स्वरूपों वाले सुरक्षा खतरे भी बढ़े हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में रुकावट ने हम सभी देशों के लिए आर्थिक कठिनाइयां भी पैदा की हैं।

उन्होंने आगे कहा, इस स्थिति में हमारे लिए सहयोग करना, अपने पारस्परिक हित में निर्णायक कदम उठाना और जिन समस्याओं का हम सभी सामना कर रहे हैं, उनके समाधान पर आपसी चर्चा और विचार-विमर्श के जरिए पहुंचना बेहद आवश्यक है।

नई दिल्ली में BIMSTEC देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ भारत के एनएसए डोवल

सबकी साझा भूमिका
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोवल ने इस क्षेत्रीय समूह BIMSTEC के महत्व को रेखांकित किया और इस संबंध में कहा कि यह क्षेत्र 1.7 अरब लोगों का ‘घर’ है, जिसमें दुनिया की लगभग 22 प्रतिशत आबादी रहती है, और इसकी संयुक्त जीडीपी लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। उनके अनुसार, यह क्षेत्र केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि यानी गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों के जरिए भी एक-दूसरे से जुड़ा है, जो एक हजार वर्ष से विकसित साझा बंधनों का नतीजा हैं।

समूह के सामने भारत का पक्ष रखते हुए डोवल ने यह भी कहा कि BIMSTEC ने कई क्षेत्रों में मजबूत सहयोग विकसित किया है और इसे सभी लोगों के लिए समृद्धि और सहनशीलता साझा करने वाले उज्ज्वल भविष्य की दिशा में काम जारी रखना चाहिए। यहां हमें समझना होगा कि डोवल की यह टिप्पणी इस बात का संकेत थी कि सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ आर्थिक और संस्थागत साझेदारी को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सुरक्षा सहयोग पर जोर
भारत का मानना है कि इस समूह के सदस्य देशों ने आतंकवाद से लड़ने, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने, साइबर खतरों पर सतत काम करने और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोग को मजबूत किया है। इसीलिए डोवल ने आगे कहा कि हमने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर खतरों और समुद्री चुनौतियों से निपटने में सहयोग को आगे बढ़ाया और मजबूत तो किया ही है, अब हम नए तथा उभरते खतरों का मिलकर सामना करने के लिए तैयार हैं।

वैसे देखा जाए तो, BIMSTEC की दीर्घकालिक प्राथमिकताएं क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण और आर्थिक सुरक्षा हैं, इसलिए डोवल का मानना है कि हमारे सामूहिक प्रयास इस दिशा में सतत चलने चाहिए। उनके इस कथन से स्पष्ट है कि भारत इस मंच को केवल औपचारिक क्षेत्रीय संस्था नहीं मानता, बल्कि वह इसे रणनीतिक और व्यावहारिक सहयोग के प्रमुख माध्यम के रूप में महत्व देता है।

भारत का पक्ष रखते हुए डोवल

भारत की सोच
भारत के एनएसए ने कहा कि BIMSTEC भारत की क्षेत्रीय पहुंच की नीति का एक केंद्रीय स्तंभ है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, भारत के लिए BIMSTEC हमारी पड़ोसी पहले की नीति, एक्ट ईस्ट नीति और महासागर के विजन का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका अर्थ है क्षेत्रों के बीच सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति।

बेशक, अब तक का रिकार्ड देखें और पिछली बैठकों में भारत की भूमिका देखें तो साफ होता है कि भारत ने BIMSTEC जैसे मंच को पर्याप्त महत्व दिया है। भारत इस मंच को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु की तरह देखता है। महासागर विजन का उल्लेख यह भी दर्शाता है कि भारत सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्थिक संपर्क और समग्र विकास को एक साथ जोड़कर क्षेत्रीय रणनीति आगे बढ़ाना चाहता है।

क्या है BIMSTEC
BIMSTEC समूह 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के बाद गठित किया गया था। इसके सदस्य देश हैं—बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। यह संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि बंगाल की खाड़ी को साझा क्षेत्रीय सहयोग के केंद्र के रूप में भी देखता है।

आंकड़ों के अनुसार, BIMSTEC लगभग 1.7 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जो विश्व की लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या है, और इसकी संयुक्त जीडीपी लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। यह आंकड़ा समूह के आर्थिक और जनसांख्यिक महत्व को दर्शाता है।

नई दिल्ली में हुई इस 5वीं बैठक में सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख उपस्थित रहे। इस सबने डोवल के कहे का अनुमोदन किया कि बढ़ती वैश्विक अस्थिरता, आतंकवाद, साइबर खतरे, समुद्री सुरक्षा चुनौतियां और आर्थिक रुकावटों के बीच समूह के सभी सदस्य देशों को एकजुट होकर काम करना होगा।

Share