मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अध्यक्ष जीतु पटवारी के भाई नाना पटवारी का नाम इंदौर में एक ड्रग पकड़ मामले में सामने आया है। इस मामले में उन्हें हिरासत में लिया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला कुछ यूं है कि इंदौर के राजेंद्र नगर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम हैं इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और रानी भाई। उनके पास से 10.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद हुई। पुलिस के मुताबिक, ये ड्रग दो लोगों नाना पटवारी और मनाव गंगवानी को सप्लाई की जानी थी।
इसको लेकर डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस नरेंद्र रावत ने मीडिया को बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने ये बात कही। उन्होंने नाना पटवारी के पुराने रिकॉर्ड की भी बात की और कहा कि उनके खिलाफ पहले से नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अभी इस पूरे सप्लाई चेन की जांच कर रही है। अभी तक ये साफ नहीं बताया गया है कि नाना पटवारी को गिरफ्तार किया गया है या नहीं।
जीतु पटवारी का बयान
जीतु पटवारी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर मुख्यमंत्री मोहन यादव को टैग करते हुए लिखा कि बिना बताए उनके भाई को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनका आरोप है कि ये भाजपा सरकार की राजनीतिक बदला लेने की कार्रवाई है। उन्होंने कहा, “जो भी सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे कानून के जरिए दबाया जाएगा।” जीतु पटवारी का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को फर्जी केस में फंसाने की तैयारी पहले से थी, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं और लड़ाई जारी रखेंगे।
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कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ कांग्रेस नेता विवेक तंखा ने बताया कि जीतु पटवारी ने उन्हें सूचित किया है। उनके अनुसार, पुलिस ने अचानक जीतु के छोटे भाई को गिरफ्तार कर लिया, बिना किसी जुर्म की जानकारी दिए और परिवार को ये भी नहीं बताया कि उन्हें कहां ले जाया गया है।तंखा ने डीजीपी, इंदौर पुलिस कमिश्नर और डिविजनल कमिश्नर से अपील की कि ऐसी स्थिति न बनाई जाए जिससे आगे परेशानी हो।
घटना उस समय हुई है जब कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस के पूर्व महासचिव और प्रवक्ता राकेश सिंह यादव भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने जीतु पटवारी, विपक्ष के नेता उमंग सिंघार और एआईसीसी प्रभारी हरीश चौधरी पर पार्टी को “ब्रोकर्स की तरह चलाने” का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि राकेश सिंह यादव ने इस्तीफा नहीं दिया था, बल्कि अनुशासनहीनता के लिए उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था।
















