धर्म-संस्कृति

डिजिटल दौर में भी बढ़ रही है गीता प्रेस की पुस्तकों की मांग

गीता प्रेस से प्रकाशित इन धार्मिक पुस्तकों में सबसे अधिक मांग श्रीमद्भगवद्गीता व श्रीरामचरितमानस की है।

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सुनील राय

इस डिजिटल दौर में जहां किताबों की बिक्री पर असर पड़ा है। वहीं  गीता प्रेस की धार्मिक पुस्तकों की मांग बढ़ती जा रही है। गत 5 वर्षों में गीता प्रेस की पुस्तकों की बिक्री 58 करोड़ रुपये से बढ़कर 138 करोड़ रुपये पहुंच गई है। डिजिटल और ई – बुक के इस दौर में धार्मिक पुस्तकों की बिक्री के ये आंकड़े, इस बात को दर्शाते हैं कि लोगों की रुचि धार्मिक किताबों में बढ़ी है।

गीता प्रेस दिसंबर 2025 तक विभिन्न तरह की पुस्तकों की 101 करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित कर चुका है। गीता प्रेस से प्रकाशित इन धार्मिक पुस्तकों में सबसे अधिक मांग श्रीमद्भगवद्गीता व श्रीरामचरितमानस की है। अत्यधिक मांग को देखते हुए 18.44 करोड़ प्रतियां गीता तथा 13.21 करोड़ प्रतियां मानस की प्रकाशित की जा चुकी हैं। इसके अलावा पुराण, उपनिषद, भक्ति साहित्य, धार्मिक पुस्तिकाएं और संस्कार संबंधी पुस्तकों को भी तेजी से  प्रकाशित किया जा रहा है।

प्रबंधक गीता प्रेस डा. लालमणि तिवारी का कहना है कि डिजिटल माध्यमों का  विस्तार हो रहा है। उसके बाद भी  धार्मिक पुस्तकों के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास में बढ़ोत्तरी हुई है। भारी  संख्या में श्रद्धालु श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस और अन्य धार्मिक ग्रंथों को मुद्रित स्वरूप में पढ़ना चाहते हैं। इसीलिए गीता प्रेस की पुस्तकों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। पुस्तकों की कीमत बहुत कम रखी जाती है ताकि  समाज का हर वर्ग इन पुस्तकों को ख़रीद सके।

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