पाकिस्तान हाल में अपनी प्राचीन सभ्यता की जड़ों को लेकर बात कर रहा है। खासतौर पर सिंधु घाटी सभ्यता, तक्षशिला और गांधार जैसी जगहों को अपनी पहचान से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। ये इलाके आज पाकिस्तान में हैं और हज़ारों साल पुरानी भारतीय उपमहाद्वीप की साझा विरासत का हिस्सा हैं। लेकिन इसी के साथ एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिख रहा है। वो ये कि उसने अपनी सभी मिसाइलों के नाम मुगल आक्रांताओं के नाम पर रखे हैं।
पाकिस्तान की पहचान कैसे बनी?
1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान दो-राष्ट्र सिद्धांत पर बना। शुरू में भी इसकी जड़ें इस्लामी इतिहास से जोड़ी गईं। जनरल जिया-उल-हक के समय में तो और भी सख्त इस्लामी पहचान अपनाई गई। स्कूलों की किताबों में पाकिस्तान का इतिहास मुहम्मद बिन कासिम के 712 ईस्वी में सिंध पर हमले से शुरू होता था। अब हाल के सालों में, खासकर 2025 में इंडस वॉटर ट्रीटी पर भारत के कदम के बाद, पाकिस्तान अपनी कहानी को और पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता तक ले जा रहा है। डॉक्यूमेंट्री, टूरिज्म और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के जरिए ये दिखाने की कोशिश है कि ये भूमि सिर्फ इस्लामी नहीं, बल्कि उससे भी पहले की सभ्यताओं की है।
प्राचीन विरासत क्या है?
आज का पाकिस्तान वाला इलाका हजारों साल पुराना है। यहां सिंधु घाटी सभ्यता (इंडस वैली सिविलाइजेशन) फली-फूली। बाद में सप्त सिंधु क्षेत्र में वैदिक संस्कृति आई। गांधार (टैक्सिला के आसपास) बौद्ध और अन्य परंपराओं का बड़ा केंद्र रहा। ये सब दक्षिण एशिया की साझा सांस्कृतिक जड़ें हैं, जिनमें हिंदू, बौद्ध और जैन प्रभाव भी शामिल हैं।
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मिसाइलों के नाम और विरोधाभास
पाकिस्तान की सेना के हथियारों के नाम इस नई कोशिश से मेल नहीं खाते। ज्यादातर मिसाइलें और हथियार उन शासकों या इस्लामी इतिहास के नाम पर हैं जिन्होंने इस इलाके पर बार-बार हमले किए थे।
- हत्फ-II अब्दाली: अहमद शाह दुर्रानी (अफगान आक्रांता) के नाम पर, जिसने 18वीं सदी में भारत पर कई बार हमले किए।
- हत्फ-III ग़ज़नवी: महमूद ग़ज़नवी के नाम पर, जिसने 1025 में सोमनाथ मंदिर लूटा था।
- हत्फ-V ग़ौरी: मुहम्मद गोरी के नाम पर, जिसकी 1192 की लड़ाई ने दिल्ली सल्तनत की नींव रखी।
- हत्फ-VII बाबर: मुगल आक्रांता बाबर के नाम पर।
- तैमूर क्रूज मिसाइल: तैमूर लंग के नाम पर, जिसने 1398 में दिल्ली को बुरी तरह लूटा।
इसके अलावा कई हथियार अरबी शब्दों या पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी चीजों (जैसे जुल्फिकार, अनजा, रअद) से नाम लिए गए हैं। टैंक अल-खालिद, अल-जरार जैसे अरब जनरलों के नाम पर हैं।
अब कर रहा सिंधु सभ्यता की बात
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान का इतिहास इस्लाम से पहले का भी है। अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, कनिष्क, जैन और बौद्ध धर्म सब इसकी विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने महमूद ग़ज़नवी को लूटेरा बताया था, जबकि उसी के नाम पर एक मिसाइल है। पाकिस्तान अब पुरानी सिंधु सभ्यता जड़ों को अपनी कहानी में शामिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी सेना और हथियारों के नाम अभी भी मुख्य रूप से इस्लामी और विजेता शासकों से जुड़े हुए हैं। ये दोनों बातें एक साथ चल रही हैं।














