वन संरक्षण और हरित विकास में ओडिशा देश में अग्रणी, 2 वर्षों में 558 वर्ग किमी बढ़ा वन एवं वृक्ष आवरण: CM मोहन चरण माझी
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वन संरक्षण और हरित विकास में ओडिशा देश में अग्रणी, 2 वर्षों में 558 वर्ग किमी बढ़ा वन एवं वृक्ष आवरण: CM मोहन चरण माझी

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती भीषण गर्मी की चुनौती से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण ही सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jul 7, 2026, 07:02 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती भीषण गर्मी की चुनौती से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण ही सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान है। विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। इसी सोच के साथ ओडिशा सरकार वन संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य ने पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।पिछले दो वर्षों में ओडिशा में 558 वर्ग किलोमीटर वन एवं वृक्ष आच्छादन की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी उपलब्धि के आधार पर ओडिशा देश में वन एवं हरित क्षेत्र बढ़ाने के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री कपीलेश्वर में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रमुख नदियों को वर्षभर प्रवाहमान बनाए रखने के उद्देश्य से ‘सबुज महानदी मिशन’ के तहत महानदी, तेल, इब, ब्राह्मणी, ऋषिकुल्या, बैतरणी और वंशधारा नदियों के दोनों किनारों पर 1.5 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी विकसित की जा रही है। वर्ष 2025-26 में 774 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.65 लाख पौधे लगाए गए, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 2,702 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 9 लाख पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि ‘वर्धित हरित पट्टी योजना’ के अंतर्गत चालू वर्ष में 358 हेक्टेयर भूमि पर 15.93 लाख पौधे लगाए जाएंगे। वहीं, शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से लगभग 6.95 लाख पौधे लगाने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आम जंगल योजना’ के तहत 19,975 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र का पुनर्जीवन किया गया है। इसके साथ ही 43.18 लाख स्थानीय हितग्राहियों को 1,488.52 करोड़ रुपये की आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि कैंपा (CAMPA) योजना के तहत आगामी वर्ष में 20,562 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर वृक्षारोपण किया जाएगा। जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से संचालित ओडिशा फॉरेस्ट सेक्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट-2 (OFSDP-II) के माध्यम से 1,210 वन सुरक्षा समितियों को सशक्त किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की ‘मिष्टी (MISHTI)’ योजना के तहत 89 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव (हेंताल) वन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं ECRICC परियोजना के माध्यम से 2,405 हेक्टेयर लवणीय वनों का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि को कम करने के उद्देश्य से पिछले वित्तीय वर्ष में 17.90 लाख ताड़ के पौधे लगाए गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से ‘विकसित भारत-रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ लागू किया गया है। यह योजना वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ओडिशा के लोगों ने इसे जन आंदोलन का रूप दे दिया है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर राज्य में एक ही दिन में 1 करोड़ 49 लाख पौधे लगाए गए थे। इसके अलावा ‘मेरी लाइफ’ पोर्टल पर अब तक 8 करोड़ 12 लाख पौधारोपण का विवरण अपलोड किया जा चुका है। चालू वर्ष के लिए केंद्र सरकार ने ओडिशा को 3 करोड़ 76 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमं सामाजिक संगठनों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं से पर्यावरण संबंधी नियमों के सख्ती से पालन की मांग उठाने का आह्वान किया और राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाकर स्वस्थ, हरित और समृद्ध ओडिशा के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेशराम सिंह खुंटिया ने कहा कि वन संरक्षण और वनीकरण को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं के बल पर वन संरक्षण संभव नहीं है। इसके लिए गांवों से लेकर शहरों तक प्रत्येक नागरिक और सामाजिक संगठनों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
समारोह के दौरान वन संरक्षण एवं वनीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए अनुगुल की जेरेंग बुधीपाहाड़ वन सुरक्षा समिति तथा मयूरभंज की गुड़गुड़िया पर्यावरण विकास समिति (ईडीसी) को राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दोनों समितियों को दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर एकाम्र-भुवनेश्वर के विधायक बाबू सिंह, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. के. मुरुगेशन सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Topics: Odisha NewsCM Mohan Charan MajhiOdisha Forest ConservationOdisha leads the country in forest conservation and green development
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