दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥
भावार्थ-
दुःखों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में कष्ट नहीं होता तथा सुख प्राप्त होने पर जो निस्पृह रहता है (जिसे बहुत प्रसन्नता नहीं होती), जिसमें राग, भय, क्रोध नहीं हो, ऐसा व्यक्ति स्थिर बुद्धि वाला कहा जाता है। (समाज का कार्य करने वाला स्थिर बुद्धि ही होना चाहिये।)












