देहरादून: उत्तराखंड में तकरीबन साढ़े आठ लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से SIR में कटने जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन ने इसी के आधार पर अपनी सूची तैयार कर ली है। इनमें ज्यादातर नाम मृतक, किराएदार, पलायन करने वाले मतदाता हैं। 14 जुलाई को निर्वाचन आयोग एक ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा। उसके बाद हटाए जाए नाम इसमे शामिल नहीं होंगे।
जानकारी के मुताबिक, हटाये गए नामों को लेकर राजनीतिक दलों में बेचैनी है हर दल यही कहता सुना जा रहा है कि हमारे वोट कट गए। यूपी से लगे उत्तराखंड के गांवों कस्बों शहरों में मतदाता सूचियों में दोहरे नाम भी देखे गए हैं। यानि एक नाम उत्तराखंड और वही नाम यूपी की मतदाता सूची में भी दर्ज है,इसी तरह एक नाम गांव की मतदाता सूची में है और वही नाम शहर की मतदाता सूची में भी दिखाई दे रहा है। ऐसे नाम संदेह की घेरे में हैं, जिन्हें अब एक ही स्थान पर दर्ज किया जाएगा।
राज्य का जिलेवार हाल
उत्तराखंड में जिलावार देखें तो 8,41,020 में से देहरादून में 1,90,815, ऊधमसिंह नगर में 1,82,162, अल्मोड़ा में 55,930, पौड़ी में 53,386, हरिद्वार में 1,31,047, नैनीताल में 72,083, टिहरी में 44,062, चंपावत में 17,827, चमोली में 23,631, उत्तरकाशी में 18,470, पिथौरागढ़ में 27,615, बागेश्वर में 13,090 और रुद्रप्रयाग में 10,902 मतदाता अनकलेक्टेबल श्रेणी में हैं। इनमें से कुल 1,24,278 मृतक मतदाता तो सीधे तौर पर हट जाएंगे। बाकी पर भी फैसला होगा।
शीर्ष-10 सर्वाधिक वोटर खतरे वाली सीटों में सात सीटें काशीपुर, धर्मपुर, ऋषिकेश, रायपुर, रुद्रपुर, सहसपुर और डोईवाला वर्तमान में भाजपा के पास हैं। वहीं, तीन बाजपुर, किच्छा और हल्द्वानी वर्तमान में कांग्रेस के पास हैं। इसकी जानकारी संबंधित राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जा चुकी है।

बरहाल उत्तराखंड में SIR ने कई नेताओं के राजनीतिक समीकरण बिगाड़ देने है। अभी मतदाता सूची में नए नाम भी जुड़ेंगे। एक विषय ये भी चर्चा में है कि निर्वाचन आयोग अब सभी चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची बनाए जाने की तैयारी में है, इनमें लोकसभा,विधान सभा,स्थानीय निकाय चुनाव भी शामिल है। भारत सरकार पहले से ही वन नेशन वन इलेक्शन की बात कर रही है।मौजूदा SIR को इसी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जारहा है।












