
यशराज फिल्म्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म अल्फा रिलीज हो चुकी है और साथ ही इसकी आलोचना भी सोशल मीडिया पर लगातार हो रही है। आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि इसमें लोगों के अनुसार इसमें वही घिसापिटा फॉर्मूला है। मगर जिस बात पर सबसे ज्यादा आलोचना हो रही है, वह इस पर कि खलनायक बॉबी देओल एक पाकिस्तानी एजेंट होता है और वह अंत में पता चलता है।
लोग आलोचना कर रहे हैं कि इस फिल्म के माध्यम से धुरंधर फिल्म द्वारा भारत की मजबूत छवि बनी थी, उस पर प्रहार का प्रयास किया गया है।
गौरतलब है कि धुरंधर में “हमज़ा” एक भारतीय एजेंट होता है और वह धीरे धीरे पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों को खत्म करता है। लोगों का कहना है कि “अल्फा” फिल्म में बॉबी देओल भी भारत में बैठे लोगों की हत्या करता है, मगर वह पाकिस्तानी एजेंट है और वह देशभक्तों की हत्या करता है। हालांकि यह अंत में पता चलता है कि वह पाकिस्तानी एजेंट है, जबकि फिल्म मे उसने सेना के अधिकारी की भूमिका निभाई है।
अब लोग इस बात पर भी आलोचना कर रहे हैं कि क्या भारतीय सेना की चयन प्रक्रिया इतनी खोखली है कि वह यह पहचान ही नहीं पाते हैं कि सेना में भर्ती कौन हो रहा है? और यह भी भारत की एजेंसी नहीं पता लगा पा रही है कि आखिर सेना में रहते हुए कौन भारत के बड़े डॉक्टर्स और अधिकारियों को मार रहा है।
इस फिल्म पर धुरंधर की सस्ती कॉपी होने का आरोप तो लग ही रहा है, मगर साथ ही इस पर यह भी आरोप लग रहा है कि यह पाकिस्तान समर्थक फिल्म है। इस फिल्म के आलोचक यह कह रहे हैं कि इस फिल्म में यह बताया गया है कि बॉबी देओल, जो कि भारत की सेना में पाकिस्तानी एजेंट है, वह कभी पाकिस्तानी सेना में मेजर हुआ करता था और फिर वह भारत की सेना में बहुत महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त हो जाता है।
आलोचकों का कहना है कि आखिर कैसे कोई भारत और भारत की सेना का मजाक उड़ाने वाली ऐसी फिल्म बना सकता है?
वहीं इसे लेकर एक और विवाद सामने आया है। पाकिस्तानी कलाकार इकरा का एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुआ। उसमें उन्होनें लिखा था कि “यह जरूर देखी जाने वाली फिल्म है। धुरंधर को हमारा जबाव!” और इसके साथ ही शाहरुख खान के साथ रईस फिल्म मे काम कर चुकी माहिरा खान की भी सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई, जिसमें उन्होनें लिखा था कि चलो, फिर से वही बॉलीवुड फिल्म वापस आई, जिसे हम देखते हुए बड़े हुए हैं।
🚨 CBFC UNDER FIRE
A social media backlash has erupted after Pakistani actresses promoted Alpha on Instagram.
Users are demanding answers from the CBFC over its approval of the film, alleging it contains scenes disrespecting the Indian Army.
CBFC board includes:
* Vivek… pic.twitter.com/2VHzBBZjYU
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) July 4, 2026
ये दोनों स्क्रीन शॉट्स जब वायरल हुए, तब इसे लेकर और भी हंगामा हुआ। इकरा अज़ीज़ पाकिस्तान की जानीमानी अदाकारा हैं। वहीं माहिरा तो भारत में काम भी कर चुकी हैं। मगर माहिरा सहित पाकिस्तान की अभिनेत्रियाँ और अभिनेता, फिलहाल भारत की फिल्मों में काम नहीं कर पा रहे हैं। भारत में काम करना उन सभी की दिली ख्वाहिश रहती है। और हाल ही में एक अभिनेत्री का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमे उन्होनें कहा था कि अब बॉलीवुड का माहौल बदल गया है और उनके हिसाब से फिल्में नहीं बनती हैं।
चूंकि भारत में पाकिस्तानी अभिनेत्रियों और अभिनेताओं के सोशल मीडिया हैंडल प्रतिबंधित हैं, तो खबरें सूत्रों के माध्यम से या स्क्रीनशॉट्स के माध्यम से ही आती हैं।
उनलोगों के दिलों में भारत के प्रति इस सीमा तक घृणा है कि वे पाकिस्तानी ड्रामों के कथित पतन के लिए भी भारतीय दर्शकों को दोषी ठहराते हैं। हाल ही में एक पाकिस्तानी एक्टर और होस्ट यासिर हुसैन ने कहा था कि जब से भारत में पाकिस्तानी ड्रामा दिखाए जाने लगे हैं, तब से उनकी क्वालिटी गिर गई है क्योंकि भारत के लोग “परिपक्व” सामग्री पसंद नहीं करते हैं।
वही जहाँ भारत मे कथित प्रगतिशील वर्ग में यह कहा जाता है कि कलाओं को राजनीति में नहीं बांधना चाहिए और भारत सरकार की आलोचना इस बात को लेकर होती है कि वह पाकिस्तानी कलाकारों को फिल्मों में काम नहीं करने देती है तो वहीं पाकिस्तान के वे कलाकार जिन्हें भारत में हिन्दी फिल्मों में काम मिला, वे हर अवसर पर अपने मुल्क के साथ खड़े होते हैं, जैसे कि अभी इमरान अब्बास, जो भारत की कई फिल्मों मे काम कर चुके हैं, उन्होनें सिंधु जल संधि पर भारत की आलोचना की थी।
हालांकि इकरा अज़ीज़ के वायरल स्क्रीन शॉट को लेकर पुष्टि नहीं हुई है, और इसे झूठ कहा जा रहा है, परंतु पाकिस्तान के कलाकारों के पूर्व के आचरण को देखकर यह कहपाना मुश्किल है कि ऐसा कुछ इकरा ने नहीं कहा होगा। भारत में रईस जैसी फिल्मों में काम करने वाली माहिरा ने भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” को कायरना बताते हुए भारत की आलोचना खुलेआम की थी। अब देखना होगा कि पाकिस्तान समर्थक होने का आरोप झेल रही यह फिल्म क्या वास्तव में पूर्व की प्रोपोगैंडा फिल्मों जैसी ही तो नहीं है?