
नई दिल्ली। उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी मदरसा बोर्ड समाप्त हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड सरकार से संपर्क कर वहां लागू किए गए अल्पसंख्यक शिक्षा संबंधी कानूनी प्रावधानों और ड्राफ्ट की जानकारी मांगी है। छत्तीसगढ़ सरकार यह समझना चाहती है कि इस तरह के फैसले के लिए किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया। यह भी कहा जा रहा है कि मदरसा बोर्ड समाप्त करने के लिए सूबे की सरकार उत्तराखंड के मॉडल का अध्ययन कर रही है।
अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण गठित करने का सुझाव
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर वर्तमान मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों के समग्र विकास पर असर पड़ता है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 450 से अधिक मदरसे मदरसा बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत हैं। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सलीम राज का भी कहना है कि हमारी कोशिश है कि समाज के बच्चे सिर्फ धार्मिक शिक्षा न लें बल्कि हर तरह की शिक्षा लें। बोर्ड ने मदरसा बोर्ड के स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण गठित करने का सुझाव दिया है।
उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन कर रही है सरकार!
मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के लिए सरकार उत्तराखंड मॉडल का अध्ययन कर रही है। कानूनी, प्रशासनिक और शैक्षणिक पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।