
देश की शांति, समृद्धि और सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता है। लेकिन, लगता है कि फारुक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मणिशंकर अय्यर जैसे कई नेताओं की नजर में इसकी कोई अहमियत नहीं है। ये नेता आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान से लगातार बातचीत की पेशकश कर रहे हैं। इसी क्रम में इन नेताओं ने एक खुले पत्र पर दस्तखत किए हैं।
इस पत्र पर पूरे भारत से करीब 60 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। BJP ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है।
इस पत्र को भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को भेजा गया है। इसमें दोनों सरकारों से अपील की गई है कि वे दक्षिण एशिया में शांति, सामान्य स्थिति, बातचीत और सहयोग बहाल करने के लिए ठोस और लगातार कदम उठाएं।
पत्र में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान मिलकर दुनिया की करीब एक-पांचवीं आबादी के घर हैं। यहां की बड़ी संख्या में आबादी युवा है। लगातार दुश्मनी की वजह से लाखों युवाओं को मौके, समृद्धि और सुरक्षित भविष्य से वंचित होना पड़ रहा है। इसमें आगे लिखा है कि दोनों देशों के लोग शांति, विकास, कनेक्टिविटी और सहयोग से भरे भविष्य के हकदार हैं, न कि हमेशा के अविश्वास और टकराव के। दशकों की दूरी ने हमारी संभावनाओं को रोका है और सामाजिक, आर्थिक व मानवीय नुकसान पहुंचाया है। हमारा मानना है कि लगातार जुड़ाव और बातचीत ही मतभेद सुलझाने और स्थिर व समृद्ध क्षेत्र बनाने का एकमात्र रास्ता है।
पत्र पर दस्तखत करने वालों में जम्मू-कश्मीर के मुख्य धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूख, PDP के आगा मुंतजिर मेहदी, CPM के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, RJD के मनोज झा, मणि शंकर अय्यर और कुछ अन्य नेता, पूर्व राजनयिक और नागरिक समाज के लोग शामिल हैं। कुल 117 लोगों (61 भारतीय और 56 पाकिस्तानी) ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
मीरवाइज उमर फारूख ने का कहता है कि अगर अमेरिका और ईरान बातचीत कर सकते हैं तो भारत और पाकिस्तान भी मेज पर बैठ सकते हैं। उसने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ती पुरानी समस्याओं, खासकर कश्मीर विवाद को सुलझाने का सबसे अच्छा रास्ता है।
दूसरी ओर BJP ने इस अपील पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने फारूख अब्दुल्ला और मेहबूबा मुफ्ती पर आरोप लगाया कि वे एक बार फिर पाकिस्तान की बात दोहरा रहे हैं, जबकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के शिकार लोगों के साथ खड़े होने की बजाय यह रुख अपनाया गया है। BJP का साफ कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दोनों देशों के बीच केंद्रीय एशिया और दक्षिण एशिया को जोड़ने का द्वार बन सकता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीति का जिक्र किया जो पड़ोसियों के साथ शांति पर जोर देती थी। उल्लेखनीय है कि यह पत्र ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ के तहत जारी किया गया है।