पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जनता का आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है। रावलकोट में हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते मंगलवार को इस बड़े जन-आंदोलन का 22वां दिन था। ईदगाह मैदान में हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद के नियंत्रण को पूरी तरह नकार दिया। साथ ही यह भी कहा कि कश्मीर पाकिस्तान की रियासत का हिस्सा नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे मदद के लिए भारत का रुख कर सकते हैं।
क्यों सुलग रहा है पूरा PoJK?
पीओजेके ( PoJK) में हो रहे इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन ने पाकिस्तान के हुक्मरानों और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की नींद उड़ा दी है। रावलकोट और उसके आसपास के क्षेत्रों में यह गुस्सा रातों-रात नहीं भड़का है बल्कि यह दशकों से चले आ रहे प्रशासनिक अनदेखी, खराब शासन, कमरतोड़ महंगाई, आर्थिक तंगी और पाकिस्तानी की सरकार का दमन का नतीजा है। जनता का आरोप है कि पाकिस्तान केवल उनके संसाधनों का दोहन करता है जबकि बदले में उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं। इस आंदोलन की आवाज को दुनिया तक पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने 5 जून से ही पूरे क्षेत्र में इंटरनेट ब्लैकआउट कर रखा है। संचार माध्यमों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी।
राशन की सप्लाई पर लगी रोक ने बढ़ाया गुस्सा
इस जन-आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने बहुत ही अमानवीय रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने रावलकोट और नजदीकी इलाकों में खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर 2 सप्ताह का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया। प्रशासन को लगा था कि राशन रुकने से लोग घरों में छिप कर बैठ जाएंगे, लेकिन इस नाकेबंदी ने आग में घी का काम किया और आंदोलन और ज्यादा उग्र हो गया।
स्थानीय नेता सरदार अमन खान के नेतृत्व में रावलकोट के ईदगाह मैदान पर भारी जनसैलाब उमड़ा। उन्होंने जनता को संबोधित करते कहा, ‘यह क्षेत्र (PoJK) कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था। सच तो यह है कि पाकिस्तान को हमारी जरूरत ज्यादा है न कि हमें पाकिस्तान पर निर्भर रहने की आवश्यकता है।’
भारत से मांगेंगे मदद
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वहां के लोग आसिम मुनीर को अपना सेना प्रमुख मानने से इंकार करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पीओजेके के लोग कह रहे हैं कि वे किसी तानाशाह को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस आंदोलन का दायरा केवल सभाओं तक सीमित नहीं है। पिछली 9 जून से नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक अलग और विशाल धरना प्रदर्शन चल रहा है। LoC के पास प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार ने उनके भोजन और अन्य जरूरी आवश्यकताओं पर लगी पाबंदियों को तुरंत नहीं हटाया तो इस क्षेत्र के लोग सहायता के लिए भारत की ओर देखने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो इस्लामाबाद पर ऐसा दबाव बनेगा जिसे वह संभाल नहीं पाएगा।
विदेश में भी पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
PoJK के भीतर चल रहे इस ऐतिहासिक आंदोलन की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है। यूरोप, ब्रिटेन और अन्य देशों में रहने वाले कश्मीरी प्रवासी पाकिस्तान के दूतावासों के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं।

















