
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में 27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर गए। वहां उन्होंने राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी से बातचीत की और 19 समझौतों की घोषणा की। इनमें रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, कृषि, स्पेस और एक्सट्रेडिशन संधि शामिल हैं। मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।यात्रा छोटे-छोटे कामों पर आधारित थी – एक पेट्रोल वेसल, छह एंबुलेंस, 500 टन चावल और 8,500 टन सीमेंट। लेकिन इनकी साइज नहीं, बल्कि जगह और प्रतिस्पर्धा मायने रखती है।
पिछले दस साल में भारत-सेशेल्स संबंधों में गति कम हो गई थी। मोदी 2015 में गए थे, जो इंदिरा गांधी के बाद दूसरी प्रधानमंत्री यात्रा थी। उसके बाद रक्षा ट्रेनिंग, कोस्टल राडार सिस्टम और एक डॉर्नियर एयरक्राफ्ट दिए गए, लेकिन प्रधानमंत्री स्तर पर फॉलो-अप नहीं हुआ। नया जोश सेशेल्स की तरफ से आया। अक्टूबर 2025 में पैट्रिक हरमिनी राष्ट्रपति बने। फरवरी 2026 में वे दिल्ली आए, जहां दोनों देशों ने जॉइंट विजन डॉक्यूमेंट अपनाया और भारत ने 175 मिलियन डॉलर का स्पेशल इकोनॉमिक पैकेज घोषित किया। जून की यह यात्रा उसी का आगे बढ़ाया कदम थी।
पश्चिम एशिया के युद्ध से समुद्री यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, जिससे सेशेल्स को नुकसान हुआ क्योंकि वहां ज्यादातर चीजें आयात की जाती हैं। भारत ने खाना और निर्माण सामग्री भेजी, जिससे वह पहला सहायक देश बनकर उभरा।
सेशेल्स की आबादी सिर्फ 1.3 लाख के आसपास है और 2023-24 में भारत के साथ व्यापार 84.88 मिलियन डॉलर का था। मगर इसकी अहमियत उसकी लोकेशन से है। 115 द्वीपों वाला यह द्वीपसमूह पश्चिमी हिंद महासागर में है, जो गल्फ, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले समुद्री रास्तों पर स्थित है। इसका समुद्री क्षेत्र करीब 14 लाख वर्ग किलोमीटर है। मोदी ने असेंबली में इसे “छोटा द्वीप राष्ट्र नहीं, बल्कि बड़ा महासागर देश” कहा।
भारत अपनी तटरेखा से इस पूरे इलाके की निगरानी नहीं कर सकता, इसलिए वर्षों से द्वीपों पर नजर रखने की कोशिश कर रहा है। कोस्टल राडार सिस्टम लगाया गया, दो डॉर्नियर एयरक्राफ्ट दिए गए और भारतीय स्टाफ तैनात है। दोनों नेताओं ने पाइरेसी, ड्रग तस्करी और अवैध मछली पकड़ने को मुख्य समस्याएं बताया।
दरअसल, यात्रा का अनकहा कारण चीन है। पीएम मोदी की इस यात्रा से पहले सेशेल्स ने चीन के साथ 50 साल पूरे किए। चीन पिछले दो दशक से छोटे द्वीप देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर लोन, पोर्ट प्रोजेक्ट और डिफेंस डील के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति हरमिनी किसी पक्ष में नहीं जाते। अप्रैल 2026 में वे मॉस्को गए, जिससे यूरोपीय संघ नाराज हुआ। अगले साल बीजिंग जाने वाले हैं। भारत उन्हें कोई चुनना नहीं सिखा रहा, बल्कि पहला भरोसेमंद साथी बनना चाहता है।
विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा कि संबंध “ट्रांजेक्शनल नहीं” हैं। भारत चीनी लेंडिंग के मुकाबले ग्रांट, ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण का मॉडल देता है। मालदीव में “इंडिया आउट” अभियान से सबक लिया गया है कि बिना संस्थागत जड़ों के मौजूदगी कमजोर रहती है।
सेशेल्स और भारत के बीच कई अहम समझौते हुए हैं। इसमें वित्तीय फाइनेंशियल बैकिंग का मुख्य हिस्सा एक्सिम बैंक की 1,250 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट है। 175 मिलियन डॉलर पैकेज में 125 मिलियन डॉलर का लोन और 50 मिलियन डॉलर की ग्रांट शामिल है, जिससे 1,000 सोशल हाउसिंग यूनिट और 250 इलेक्ट्रिक बसें आएंगी।
डिजिटल पेमेंट में UPI सिस्टम सेंट्रल बैंक ऑफ सेशेल्स के जरिए लगेगा। स्वास्थ्य में जन औषधि स्कीम के तहत जेनेरिक दवाएं और नया नेशनल हॉस्पिटल। कृषि, स्पेस, एक्सट्रेडिशन और सेशेल्स फ्लैग वाले जहाजों के सर्टिफिकेशन पर भी समझौते हुए। रक्षा में PS Lespwar पेट्रोल वेसल सौंपा गया, PS Zoroaster को रिफिट किया गया, डॉर्नियर का अपग्रेड हुआ। मार्च में एक्सरसाइज लामित्ये का 11वां संस्करण ट्राई-सर्विस स्तर पर हुआ। सेशेल्स कोस्टल डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर कोएलिशन में शामिल हुआ। हाइड्रोग्राफिक यूनिट बनाने पर सहमति हुई। मोदी ने डायरेक्ट शिपिंग लिंक और लोकल करेंसी में व्यापार का प्रस्ताव रखा।
यह यात्रा भारत की नई समुद्री नीति MAHASAGAR का पहला बड़ा परीक्षण है। 2015 में SAGAR की घोषणा मॉरीशस में हुई थी। 2025 में इसे MAHASAGAR बनाया गया, जिसमें क्लाइमेट, ब्लू इकोनॉमी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जोड़े गए। सेशेल्स इसमें नामित पार्टनर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन” सम्मान मिला।