भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मुद्दे पर अभी भी चर्चा जारी है। लेकिन इसी कड़ी में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। सिर्फ 1 या 2 प्रतिशत काम बाकी है, जो मुख्य रूप से कानूनी शब्दों और कुछ छोटी-मोटी बातों को अंतिम रूप देने का है।
उन्होंने कहा कि सर्गियो गोर ने 30 जून 2026 को IX भारत-अमेरिका स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप पार्टनरशिप में यह बात कही। उन्होंने बताया कि यह समझौता करीब 18 महीने से बन रहा है। बीच में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की वजह से थोड़ी देरी हो गई, लेकिन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ली ग्रीर की दिल्ली में दो दिन की यात्रा के बाद फिर सब पटरी पर आ गया है।
गोर ने कहा, “हम सोच रहे थे कि डील हो गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ और रास्ता अपनाया। अब हम आखिरी चरण में हैं। ज्यादातर हिस्सा पूरा हो चुका है। दोनों तरफ से कुछ मुद्दे बाकी हैं, लेकिन अब सिर्फ अंतिम 1-2 प्रतिशत बचा है।”
निवेश और तुलना
राजदूत गोर ने इस साल अमेरिकी दूतावास द्वारा भारत से $20.5 बिलियन (करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये) के नए निवेश वापस अमेरिका भेजने की बात कही। उन्होंने यूरोपीय देशों के दूतावासों से तुलना करते हुए कहा कि वहां वाले 500-700 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा करते हैं, जबकि दिल्ली वाले दूतावास ने बहुत ज्यादा काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि यूरोप वाला व्यापार समझौता तो 20 साल में बना था, जबकि भारत वाला डेढ़ साल में ही लगभग तैयार हो गया है।
भारत को लेकर सकारात्मक हैं ट्रंप
गोर ने वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी दो घंटे की निजी मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ट्रंप भारत को लेकर बहुत सकारात्मक हैं। उनकी पिछली भारत यात्रा उनके लिए खास रही थी और वे उसकी तारीफ करते रहते हैं। ट्रंप भारत के साथ “विन-विन” यानी दोनों के फायदे वाली साझेदारी चाहते हैं।
संबंधों की मजबूती
राजदूत ने साफ कहा कि व्यापार, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों के मामले में भारत-अमेरिका का रिश्ता बहुत मजबूत है। भारत अमेरिका को दुनिया के किसी भी दूसरे देश से ज्यादा सामान और सेवाएं निर्यात करता है। रक्षा सहयोग में भी अमेरिका भारत के साथ सबसे ज्यादा संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच हर रोज नई-नई चीजें सामने आती हैं जिन पर साथ काम किया जा सकता है – चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो, गहरी टेक्नोलॉजी, या रक्षा क्षेत्र। उन्होंने इसे “असीम संभावनाएं” बताया।
अभी दोनों सरकारों का फोकस बाकी बचे कानूनी हिस्से को जल्द से जल्द पूरा करने पर है, ताकि ट्रंप और मोदी द्वारा तय किए गए 500 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
















