पंजाब सरकार द्वारा पारित नए बेअदबी कानून को लेकर सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में सुनवाई हुई। आम आदमी पार्टी के सिख मंत्री और विधायक तीन बड़ी गाड़ियों के काफिले में पहुंचे। सभी नेता नंगे पैर श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे और लिखित स्पष्टीकरण सौंपा।
सुनवाई के बाद जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार को एक माह का समय दिया है। जत्थेदार ने कहा कि इस दौरान बेअदबी कानून की सभी आपत्तियों को दूर किया जाए। जब तक कानून में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक इस कानून को लागू न किया जाए।
क्या बोले सरकार के मंत्री
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जत्थेदार के साथ लंबी और सकारात्मक चर्चा हुई। श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बैठक के अंदर हुई चर्चा का सार्वजनिक खुलासा करना उचित नहीं है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जथेदार की ओर से प्रस्तावित संशोधन पंजाब विधानसभा के स्पीकर के माध्यम से भेजे जाएंगे। संशोधन प्राप्त होने के बाद सरकार और विधायक उनका विस्तृत अध्ययन करेंगे और एक महीने के भीतर अपना निर्णय लेंगे।
सीएम के बयान पर उठाए सवाल
इससे पहले जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाए। पहला, मुख्यमंत्री के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बेअदबी करने वाला मानसिक रूप से बीमार हो तो उसके माता-पिता या अभिभावक को सजा मिलेगी। जत्थेदार ने पूछा कि क्या ऐसी कोई व्यवस्था कानून में दर्ज है। इस पर कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
कहा कानून बनाने से पहले सलाह लें
दूसरे सवाल में जत्थेदार ने कहा कि सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन सिख समुदाय से जुड़े मामलों में अकाल तख्त, शिरोमणि कमेटी और अन्य सिख संस्थाओं से औपचारिक सलाह ली जानी चाहिए थी। कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था।
पेशी से पहले जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने आरोप लगाया कि सरकार ने खालसा पंथ और सिख संस्थाओं की राय लिए बिना कानून में संशोधन कर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किया है।















