25 जून 1975 केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह अध्याय है जब सत्ता बचाने के लिए संविधान, न्यायपालिका और नागरिक स्वतंत्रताओं पर अभूतपूर्व प्रहार किए गए। क्या आपातकाल अचानक लगाया गया था या इसकी तैयारी वर्षों पहले से चल रही थी? बैंक राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स विवाद, केशवानंद भारती मामला, न्यायपालिका में हस्तक्षेप और विपक्ष के दमन जैसे फैसलों ने कैसे उस अंधेरे दौर की नींव रखी? इस विशेष प्रस्तुति में देखिए आपातकाल की पूरी कहानी, उन निर्णयों की परख जिन्होंने लोकतंत्र को संकट में डाल दिया और उन लोगों के संघर्ष को भी, जिन्होंने दमन के सामने झुकने से इनकार कर दिया। यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि लोकतंत्र की कीमत समझने का एक अवसर है।
















