खाड़ी संकट के चलते तमाम वैश्विक दबावों के बाद भी भारत की विकास रफ्तार तेज रहने वाली है। इसका दावा ईवाई इंडिया की ताजा “इकोनॉमी वॉच” रिपोर्ट FY27 में किया गया है। रिपोर्ट में हालांकि, थोड़ा ही जीडीपी में वृद्धि दर के तेज रहने का अनुमान है। लेकिन, इससे सरकार को अपना राजकोषीय घाटा नियंत्रण में रखने में मदद करेगी। रिपोर्ट कहती है कि असली आर्थिक वृद्धि FY26 से थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन महंगाई ज्यादा रहने से नाममात्र वृद्धि बढ़ेगी, जिससे टैक्स वसूली अच्छी रहेगी और सरकार अपने खर्चे संभाल पाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है, “FY27 की वृद्धि की एक खास बात यह है कि नाममात्र जीडीपी वृद्धि FY26 की तुलना में ज्यादा रहने की संभावना है।” अगर असली जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रही, तो नाममात्र वृद्धि करीब 12.5 प्रतिशत हो सकती है। नाममात्र जीडीपी यानी मौजूदा कीमतों पर बने कुल सामान और सेवाओं का मूल्य। इसकी वृद्धि तेज होने से टैक्स कलेक्शन बढ़ता है, भले ही असली विकास थोड़ा धीमा हो।
टैक्स और खर्चे का हाल
ईवाई के अनुसार, सरकार टैक्स वसूली के अपने अनुमान हासिल कर लेगी। अगर एक्साइज ड्यूटी में कोई कटौती भी हुई, तो उसका नुकसान ऊंची टैक्स कमाई से पूरा हो जाएगा। लेकिन खर्चे की तरफ सब्सिडी बजट से ज्यादा हो सकती है। EY का अनुमान है कि FY27 में बजट में रखे गए 4.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे को या तो पूरा किया जा सकेगा या थोड़ा ज्यादा हो जाएगा।
पिछले साल FY26 में केंद्र सरकार ने अपना संशोधित राजकोषीय घाटा लक्ष्य 4.4 प्रतिशत जीडीपी का हासिल कर लिया। घाटा 15.8 लाख करोड़ से घटकर 15.2 लाख करोड़ रुपये रह गया।
पूंजीगत खर्च पर चिंता
रिपोर्ट में सरकार के पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) की वृद्धि पर चिंता जताई गई। FY26 में यह वृद्धि सिर्फ 1.6 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले यह 10.8 प्रतिशत थी। EY कहता है कि विकास को बनाए रखने के लिए सार्वजनिक निवेश को फिर से तेज करना जरूरी है। रिपोर्ट में FY27 के बजट में रखे गए 11.5 प्रतिशत कैपिटल एक्सपेंडिचर वृद्धि को हासिल करने की सलाह दी गई है।
क्या है ईवाई का अनुमान
ईवाई ने FY27 के लिए भारत की असली जीडीपी वृद्धि 6.6-6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह तभी संभव है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें कम रहें और हॉर्मुज स्ट्रेट से सामान की आवाजाही सामान्य हो जाए। इस स्थिति में CPI महंगाई 4.5 प्रतिशत, नाममात्र जीडीपी वृद्धि 12.5 प्रतिशत, राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत और चालू खाता घाटा 1.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट कहती है कि हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं को देखते हुए अगर कच्चा तेल सस्ता रहा और हॉर्मुज से शिपिंग सामान्य हुई, तो भारत की विकास गति फिर से मजबूत हो सकती है।

















