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गिरफ्तारी, अत्याचार और भय के माहौल में गुजरती थी रातें – hitler gandhi

जेल से जमानत मिलने के बाद भी रातों-रात दूसरी धाराओं में दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था। पूरे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल था।

Published by
Panchjanya

25 जून 1975 को देश में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसकी चर्चा आज भी राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है। इस विशेष प्रस्तुति में उन लोगों के अनुभवों को सामने लाया गया है, जिन्होंने आपातकाल को स्वयं देखा, झेला और महसूस किया। Emergency Exclusive के इस एपिसोड में सुनिए उस दौर की प्रत्यक्ष यादें और अनुभव, जो बताते हैं कि किस तरह आपातकाल के दौरान हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और संघ से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया। कई लोगों को हिरासत में शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। जेल से जमानत मिलने के बाद भी रातों-रात दूसरी धाराओं में दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था। पूरे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल था। लोग खुलकर अपनी बात कहने से डरते थे।

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