नई दिल्ली: हिंदू धर्म में व्रत रखने का बेहद महत्व बताया गया है। व्रत रखने से न सिर्फ हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हमारे ग्रहों का अशुभ प्रभाव भी दूर होता है और भगवान की विशेष कृपा मिलती है। यही कारण है कि हर महीने कोई न कोई व्रत जरूर आता है। ऐसा ही एक व्रत है प्रदोष व्रत जिसे रखने से साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान शिव व मां पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है। आइए प्रदोष व्रत के बारे में जानते हैं।
हर माह में दो बार आता है प्रदोष व्रत
शास्त्रों में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। प्रदोष व्रत हर माह में दो बार आता है। एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में। प्रदोष व्रत में दिनभर व्रत रखते हुए शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। इस व्रत को रखने से परिवार में सुख, वैभव और धन-समृद्धि की वृद्धि होती है और भक्तों पर भगावन की विशेष कृपा बनी रहती है। जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है उसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ रहा है।
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इस वर्ष ज्येष्ठ माह शनि प्रदोष व्रत 27 जून को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जून को रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 28 जून को देर रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगी। उदया तिथि के आधार पर शनि प्रदोष व्रत 27 जून शनिवार के दिन रखा जाएगा।
शनि प्रदोष व्रत से साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव होता है दूर
शनि प्रदोष व्रत रखने और शनिदेव की पूजा करने से शनिदोष, ढैय्या और साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। कुंडली में शनि दोष होने पर इसके अशुभ प्रभाव कम होते हैं। इसलिए ऐसे में इस समय जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है वो इस व्रत को रख सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु और कालसर्प दोष होता है, शनि प्रदोष व्रत रखने से उनको इसके अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
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