पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल: ममता की सत्ता के बाद अब पार्टी भी गई, विद्रोही गुट ने दीदी को हटाया

टीएमसी में बड़ा विद्रोह! रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया। अरूप रॉय बने नए चेयरपर्सन। विद्रोही गुट चुनाव आयोग में जाएगा असली पार्टी का दावा करने।

Published by
कुलदीप सिंह

पश्चिम बंगाल में ममता की सत्ता क्या गई, उनकी पार्टी ही टूट गई। इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट ने पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी (दिदी) को चेयरपर्सन के पद से हटा दिया है। उनकी जगह पर पूर्व मंत्री और चार बार के होड़ाह विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन बनाया गया।

यह फैसला एक प्राइवेट होटल में हुई खास बैठक में लिया गया। बैठक आधे घंटे से थोड़ी ज्यादा चली। यह फैसला विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के छह हफ्ते बाद आया है।

नई वर्किंग कमिटी बनाई

विद्रोही गुट ने साफ कहा कि वे चुनाव आयोग के पास जाएंगे और दावा करेंगे कि वे ही असली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस हैं। साथ ही पार्टी का चुनाव चिन्ह भी मांगेंगे। उन्होंने ट्रिनमूल नेशनल वर्किंग कमिटी (NWC) भी बनाई है, जिसमें 10 सदस्य हैं।

इस नई कमिटी में ममता बनर्जी के कई पुराने और करीबी साथी शामिल हैं, जैसे:

  • पूर्व कोलकाता मेयर फिरहाद हाकिम
  • पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास
  • विधायक सबीना यास्मिन और रथिन घोष (दोनों उपाध्यक्ष)
  • रितब्रत बनर्जी, संदीपन साहा और बिप्लब मित्र (महासचिव)
  • नया चेयरपर्सन अरूप रॉय

बैठक में ममता बनर्जी की कोई तस्वीर नहीं लगाई गई। रितब्रत ने बताया कि मंच पर महात्मा गांधी, बी.आर. आंबेडकर, रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम की तस्वीरें थीं। उन्होंने कहा कि ममता को मुख्य सलाहकार के रूप में रखा जा सकता है। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया।

पार्टी नियमों का हवाला दिया

रितब्रत बनर्जी ने कहा कि पार्टी संविधान के आर्टिकल 20 के मुताबिक हर तीन साल में NWC बनानी जरूरी है। पिछली NWC फरवरी 2022 में बनी थी। इसलिए नई कमिटी बनाना जरूरी था। अब राज्य और जिला स्तर पर भी कमिटियां बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी को नियमों से चलना चाहिए, न कि किसी की मर्जी से। उन्होंने पार्टी के खातों की जांच के लिए स्पेशल ऑडिटर भी नियुक्त किया है। पूछा कि क्या बैंक अकाउंट्स में चोरी का पैसा या ‘कट मनी’ है।

बैठक में 50 पूर्व कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के पार्षद भी मौजूद थे, जो आने वाले सिविक चुनाव में किस तरफ जा सकते हैं, इसका संकेत देता है। ममता गुट की नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के बेटे सौरव भट्टाचार्य (आउटगोइंग पार्षद) के आने से भी सनसनी फैली। रितब्रत ने दावा किया कि ममता गुट का एक और विधायक जल्द ही उनके साथ आ जाएगा।

ममता गुट का जवाब

ममता के वफादार गुट ने इस कदम को “अपनी मां को छुरा घोंपना” बताया। उन्होंने फिरहाद हाकिम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय समेत कई नेताओं को एंटी-पार्टी गतिविधि के लिए शो-कॉज नोटिस भेजा। बेलेघाटा के विधायक और प्रवक्ता कुनाल घोष ने इसे “कॉमेडी शो” कहा। बोले कि एक पार्टी से निकाले गए व्यक्ति सेशन कर रहा है। मामला कोर्ट में है, न्याय होगा। टीएमसी का मतलब ही ममता बनर्जी है, बाकी सब सर्कस है।

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