
फोटो साभार: द हिन्दू
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के पेरियापालयम के पास कन्नगीपैर गांव में स्थित पीटर एंड पॉल सीफूड एक्सपोर्ट कंपनी में रविवार को अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। इस हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 67 लोग अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
कंपनी झींगा प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट का काम करती है। अमोनिया को रेफ्रिजरेंट गैस के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि झींगा जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे तुरंत फ्रीज करना पड़ता है। रविवार को फैक्ट्री के अमोनिया टैंक से गैस लीक हो गई। उस समय वहां करीब 67 मजदूर मौजूद थे, ज्यादातर महिलाएं और ज्यादातर ओडिशा, झारखंड जैसी जगहों से आए माइग्रेंट वर्कर।
गैस फैलते ही मजदूरों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। तिरुवल्लूर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस ने तुरंत अरक्कोनम स्थित एनडीआरएफ की चौथी बटालियन को सूचना दी। एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम स्पेशल प्रोटेक्टिव गियर, गैस डिटेक्शन डिवाइस के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने 46 मजदूरों को मनजकरनई के वेल्स हॉस्पिटल और 21 को रेड हिल्स के वेंकटेश्वरा हॉस्पिटल पहुंचाया। गंभीर हालत वाले मरीजों को बाद में चेन्नई के राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (आरजीजीजीएच) और स्टेनली हॉस्पिटल भेजा गया। कुछ लोग आईसीयू में हैं।
पहले दिन दो महिलाओं की मौत हो गई — जुमानी जुआंग और बी. मलोथी, दोनों ओडिशा से थीं। बाद में सोमवार सुबह सात बजे तक तीन और मौतें हुईं, जिससे कुल आंकड़ा पांच हो गया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दोनों शुरूआती मृतकों के परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये देने का ऐलान किया। शवों को उनके घर राज्यों तक सरकारी खर्च पर पहुंचाने का भी आदेश दिया।
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पुलिस ने फैक्ट्री मालिक मोहन और मैनेजर डेनियल को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों पर पहले भी इंडस्ट्रियल सेफ्टी नियमों के उल्लंघन का केस चल रहा था। निरीक्षण में पाया गया था कि कंपनी के पास सही अलार्म सिस्टम नहीं था, फायर हाइड्रेंट नहीं था, कर्मचारियों के लिए जरूरी रजिस्टर नहीं रखे गए थे और नई मशीन लगाने पर रिवाइज्ड प्लान अप्रूवल भी नहीं लिया गया था। नोटिस और दोबारा चेकिंग के बावजूद सुधार नहीं किया गया, जिसके बाद चार्जशीट दाखिल हुई थी।
मुख्यमंत्री विजय ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसमें इंडस्ट्रियल सेफ्टी एंड हेल्थ के डायरेक्टर, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी और पब्लिक हेल्थ के एडिशनल डायरेक्टर शामिल हैं। कमेटी को 24 घंटे में अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिन में फाइनल रिपोर्ट देनी है। सरकार ने ऐसे हादसों को दोहराने से रोकने के लिए सभी खतरनाक इंडस्ट्रीज की तुरंत जॉइंट इंस्पेक्शन शुरू करने का आदेश दिया है। यह हादसा दिखाता है कि माइग्रेंट मजदूरों वाले दूर-दराज के औद्योगिक यूनिट्स में सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है। अमोनिया जैसी खतरनाक गैस इस्तेमाल करने वाली जगहों पर तुरंत अलर्ट सिस्टम और इमरजेंसी प्लान होना चाहिए।