गोविंद घाट चमोली: विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र हिमालयी तीर्थ श्रीहेमकुंड साहिब सनातन और सिख धर्म का ऐसा पवित्र धाम है। जो दुनिया के लिए मिसाल है। 15 हजार 500 फिट की ऊंचाई पर स्थित श्रीहेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के पहले ग्रंथी स्थानीय गाँव पुलना के नन्दा सिंह चौहान थे।
1937 में स्थापित श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के पहले ग्रंथी नन्दा सिंह चौहान ने पूरी निष्ठा से 1984 तक इस पवित्र गुरुद्वारा में यह सेवा निभाई। अद्भुत तथ्य यह भी कि कक्षा 5 तक हिन्दी भाषा में पढ़े नन्दा सिंह चौहान ने पहले कभी विधिवत तौर पर गुरुमुखी भाषा न सीखी थी और ना ही पढ़ी थी, पर गुरु कृपा और नित अभ्यास से उन्हें सुखमनी साहिब कंठस्थ हो गया था। और गुरुग्रंथ साहिब का पाठ भी नन्दा सिंह करते थे।
पुलना गाँव के निवासी और नन्दा सिंह चौहान के भतीजे भवान सिंह चौहान जानकारी बताते हैं कि उन्हें इस बात का गौरव है कि सनातन धर्म और सिख धर्म के समन्वय के सेतु के तौर पर उनके परिवार के बुजुर्ग ने श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के पहले ग्रंथी के तौर पर अपनी सेवा निष्ठा और निस्वार्थ ढंग से निष्ठा से सेवा निभाई। गोविन्द घाट और हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा कमेटी के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह भी इस तथ्य की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के पहले ग्रंथी स्थानीय गाँव पुलना के निवासी नन्दा सिंह थे।
यहीं है लोकपाल मंदिर
धार्मिक आस्था श्रद्धा के हिमालयी तीर्थ हेमकुंड साहिब के निकट ही लोकपाल मंदिर भी है। जिसे लक्ष्मण मंदिर भी कहते हैं। स्थानीय लोग लक्ष्मण मंदिर लोकपाल मंदिर में जितनी आस्था रखते हैं उतनी ही श्रद्धा श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा में भी रखते हैं। श्री हेमकुंड साहिब पवित्र स्थान का बड़ा महात्म्य है। मान्यता है कि यहाँ पर गुरु गोविंद सिंह साहब ने पूर्व जन्म में तपस्या की थी। जिसका जिक्र उनके द्वारा रचित ग्रन्थ विचित्र नाटक में मिलता है।
गोविन्द घाट हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह बताते हैं कि हेमकुंड साहिब का वर्णन गुरु गोबिंद सिंह साहब ने दशम ग्रंथ के विचित्र नाटक के छठवें अध्याय में लिखा है। जिसमें लिखा है “हेमकुंड पर्वत जहाँ सप्त श्रृंग शोभित तहाँ “। “तहाँ हम अधिक तपस्या साधी। महाकाल काल का आ राती। ”
बाबा मोदन सिंह ने की थी हेमकुंड साहिब की खोज
श्री हेमकुंड साहिब की खोज 1934 में बाबा मोदन सिंह, संत सोण सिंह ने की। जानकारी देते हुए गोविन्द घाट हेमकुंड साहिब गुरु द्वारा के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह बताया 1936 में भाई वीर सिंह की मदद से हेमकुंड गुरुद्वारा स्थापित हुआ। 1937 में गुरु ग्रंथ साहब का प्रकाश हुआ। सरदार सेवा सिंह ने बताया हेमकुंड साहिब का पहला ग्रंथी भाई नन्दा सिंह को बनाया गया। उन्होंने लगभग 1984 तक यह सेवा निभाई।
देवभूमि उत्तराखंड के इस गुरुद्वारे में और ऋषिकेश से लेकर रास्ते में स्थापित अन्य श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के प्रबंधन में पंजाब के शिरोमणि गुरुद्वारे प्रबंध कमेटी से कोई ताल्लुक नहीं है। यही वजह है कि पंजाब के लोग उत्तराखंड के श्री हेमकुंड गुरुद्वारों में अपना कब्जा करना चाहते हैं और इसी प्रयास में निहंग आज कल देवभूमि में हंगामा कर रहे हैं और स्थानीय लोगों को भी परेशान कर रहे हैं।बहरहाल श्री हेमकुंड साहिब और लक्ष्मण लोकपाल मंदिर की धार्मिक यात्रा जारी है।














