अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा और लगातार सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान से आने वाले खतरों को खत्म करने और अपने नागरिकों, सैनिकों व सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए की जा रही है। अमेरिका का साफ कहना है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार (न्यूक्लियर वेपन) बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरानी सरकार पिछले करीब 47 सालों से अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ हिंसा और आतंक को बढ़ावा देती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने कई बार अमेरिकी सैनिकों, सैन्य ठिकानों और आम नागरिकों पर हमले कराए हैं। राष्ट्रपति ने 1979 में तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले का जिक्र किया, जिसमें कई अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था।
ईरान पर आतंक फैलाने और हमलों का समर्थन करने का आरोप- इसके अलावा, 1983 में बेरूत में अमेरिकी मरीन बैरक पर हुए आत्मघाती हमले, 2000 में USS कोल जहाज पर हुए हमले और इराक में अमेरिकी सैनिकों पर किए गए हमलों के लिए भी ईरान समर्थित संगठनों को जिम्मेदार बताया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में भी ईरान के समर्थित गुटों ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना और अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कई हमले किए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान लेबनान, सीरिया, इराक और यमन जैसे देशों में आतंकवादी संगठनों को हथियार, पैसा और ट्रेनिंग देता है, जिससे पूरे क्षेत्र में अशांति फैल रही है। अमेरिका का कहना है कि ईरान समर्थित संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को इज़राइल पर बड़ा हमला किया, जिसमें 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए और कई नागरिकों को बंधक बना लिया गया।
ईरान के खिलाफ बड़ा अमेरिकी सैन्य अभियान- राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले साल “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के तहत ईरान के फोर्डो और इस्फहान स्थित न्यूक्लियर ठिकानों को नष्ट किया गया था। इसके बावजूद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की कोशिश की, जिसके चलते अब यह बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया गया है। अमेरिका ने कहा कि इस ऑपरेशन के तहत ईरान की मिसाइल क्षमता, नौसेना ताकत और आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी खतरे को रोका जा सके। राष्ट्रपति ने ईरानी सेना और सुरक्षाबलों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने पर उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। साथ ही, ईरान की जनता से अपील की गई है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और खुद को खतरे से बचाएं। अमेरिका का दावा है कि यह अभियान ईरानी जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंक फैलाने वाली सरकार के खिलाफ है। अमेरिका ने भरोसा जताया कि यह मिशन सफल होगा और क्षेत्र में शांति बहाल की जाएगी।

















