मध्य प्रदेश में मानसून सत्र में आएगा UCC विधेयक, दिवाली तक होगा लागू, विश्व हिंदू परिषद ने किया स्‍वागत
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मध्य प्रदेश में मानसून सत्र में आएगा UCC विधेयक, दिवाली तक होगा लागू, विश्व हिंदू परिषद ने किया स्‍वागत

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इस बार सबसे अधिक चर्चा समान नागरिक संहिता को लेकर है।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Jun 17, 2026, 06:16 pm IST
inभारत, मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव दस्तक देने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा और सरकार इसे इसी सत्र में पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उल्‍लेखनीय है कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार जहां इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके स्वरूप और दायरे को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में यूसीसी अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

मानसून सत्र में सरकार का बड़ा एजेंडा

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इस बार सबसे अधिक चर्चा समान नागरिक संहिता को लेकर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा कि सरकार यूसीसी का प्रस्ताव इसी सत्र में विधानसभा में लाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो यह प्रस्ताव इसी सत्र में पारित भी हो जाएगा।

मुख्यमंत्री के इस बयान ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार यूसीसी को लेकर केवल चर्चा के स्तर पर नहीं, बल्कि उसे कानून का स्वरूप देने की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुकी है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष दिवाली तक प्रदेश में यूसीसी को पूरी तरह लागू करना है।

उच्च स्तरीय समिति ने तैयार किया आधार

यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल को छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में सेवानिवृत्‍त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल किए गए हैं। समिति को राज्य में यूसीसी की व्यवहारिकता का अध्ययन करने, विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने और मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें कि सरकार ने समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और प्रारूप विधेयक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

जनमत जुटाने का व्यापक प्रयास

यूसीसी को लेकर सरकार ने केवल विशेषज्ञों की राय तक खुद को सीमित नहीं रखा। समिति ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया और समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित किया। इसके अलावा आम नागरिकों के सुझाव लेने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया। सरकार का दावा है कि अंतिम मसौदा जनता की राय और सामाजिक संवाद के आधार पर तैयार किया जा रहा है ताकि कानून अधिक व्यावहारिक और व्यापक स्वीकार्यता वाला बन सके।

विहिप ने बताया सामाजिक समानता की दिशा में कदम

सरकार की घोषणा के बाद सबसे पहली और मुखर प्रतिक्रिया विश्व हिंदू परिषद (व‍िहिप) की ओर से सामने आई। विहिप के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता विनोद बंसल ने कहा, “मध्‍य प्रदेश में डॉ. मोहन सरकार का यह बहुत सार्थक कदम है, समान नागरिक संहिता के माध्‍यम से राज्‍य के सभी लोगों को समानता का अधिकार मिलेगा और समतामूलक समाज की पुनर्प्रतिष्‍ठा हो सकेगी। इसमें यह गारंटी सुनिश्‍चित है कि बच्‍चों एवं खासकर महिलाओं के साथ कानून के स्‍तर पर कोई भेद नहीं रहेगा।”

उन्‍होंने कहा, “देश के अनेक उच्‍च न्‍यायालय यहां तक कि उच्‍चतम न्‍यायालय भी अनेक अवसरों पर कह चुका है कि ‘समान नागरिक संहिता’ आज देश की आवश्‍यकता है, उसे लागू किया जाना चाहिए, वास्‍वत में इस निर्णय से मप्र के वासियों को अनेक कानूनी विसंगतियों और दुविधाओं से मुक्‍ति मिलेगी। अब स्‍वतंत्रता के 75 वर्ष बाद ही सही कम से कम संविधान का अनुच्‍छेद 48 राज्‍य में समान रूप से लागू किया जा सकेगा, जिसकी कि संविधान सभा ने शुरू से ही वकालत की थी।”

बंसल कहते हैं कि प्रदेश सरकार का उठाया जा रहा यह कदम न सिर्फ स्‍वागत योग्‍य है, अपितु उन शेष राज्‍यों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण बनेगा, जहां पर अभी ‘समान नागरिक संहिता’ लागू नहीं हुई है।

भाजपा ने बताया देश की जरूरत

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि समान नागरिक संहिता पूरे देश की आवश्यकता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समानता और कानून के समक्ष सभी नागरिकों की बराबरी से जोड़ते हुए कहा कि देश के कई राज्यों ने इस दिशा में पहल की है और अब मध्य प्रदेश भी इसके लिए तैयार है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

हालांकि कांग्रेस ने यूसीसी का सीधे तौर पर विरोध नहीं किया है, लेकिन इसके स्वरूप और दायरे को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े किए हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि किसी विशेष समुदाय या जनजातीय वर्ग को इससे अलग रखा जाता है तो फिर इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कॉमन सिविल कोड का अर्थ सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होने वाला कानून है। इसलिए सरकार को सभी वर्गों की राय लेकर आगे बढ़ना चाहिए। मसूद ने संकेत दिया कि कांग्रेस विधायक दल के भीतर इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी और उसके बाद पार्टी अपना औपचारिक रुख स्पष्ट करेगी।

क्या है यूसीसी और क्यों बढ़ी इसकी चर्चा

समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो। वर्तमान में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में भी समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। लंबे समय से यह विषय राष्ट्रीय बहस का हिस्सा रहा है। हाल के वर्षों में उत्तराखंड द्वारा यूसीसी लागू किए जाने के बाद कई राज्यों में इसे लेकर नई चर्चा शुरू हुई। अब मध्य प्रदेश सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

Topics: मध्य प्रदेश विधानसभामध्य प्रदेशसमान नागरिक संहिताविश्व हिंदू परिषदमानसून सत्रयूसीसी विधेयक
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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