डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अब न्यायपालिका भी सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। ऑनलाइन ठगी और निवेश फ्रॉड के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साइबर फ्रॉड के एक आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को लेकर एक सख्त संदेश भी देता है।
साइबर अपराधियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान बेहद कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराधी पूरे देश में लोगों को निशाना बनाकर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा हैं। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराधियों के लिए न्यायिक दृष्टिकोण बेहद सख्त होना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने साइबर फ्रॉड के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि “आप लोग परजीवी हैं जो निवेशकों से करोड़ों रुपये ठगते हैं। साइबर अपराधियों के प्रति हमें बहुत सख्त होना होगा। आपके शिकार पूरे देश में फैले होते हैं; आप तमिलनाडु में किसी को ठगते हैं और फिर जम्मू चले जाते हैं… समाज का हित इसी में है कि आप जेल के अंदर रहें।
बेंच ने यह भी कहा कि पीड़ित अक्सर देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं और उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में समाज की सुरक्षा और आम नागरिकों के हित में यही जरूरी है कि इन अपराधियों को जमानत देने में अत्यधिक सावधानी बरती जाए। कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि साइबर अपराध के मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को और अधिक मजबूत और समन्वित तरीके से काम करना होगा।
















