राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा पर सहयोगियों में भ्रामक जानकारी
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राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा पर सहयोगियों में भ्रामक जानकारी

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा को उन्होंने सफल बताया, लेकिन हरियाणा, बिहार, ओडिशा, अरुणाचल और अन्य राज्यों के चुनाव परिणाम बताते हैं कि ये यात्राएं कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा साबित हुईं। आंतरिक नेतृत्व संकट दूर करने का प्रयास, लेकिन जनता ने ठुकराया।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Jun 16, 2026, 10:59 am IST
in विश्लेषण

8 जून को इंडि गठबंधन की एक बैठक में अपनी राजनीतिक भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा की चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने उसे बहुत ही सफल बताया और सहयोगियों पर निशाना साधा। मगर राहुल गांधी अपनी यात्रा का चर्चा करके अपने सहयोगियों और विरोधियों, दोनों की आँखों में धूल झोंकने का काम करते हैं। राहुल गांधी ने हरियाणा और बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को बल देने के लिए राहुल गांधी ने यात्रा की थी। हरियाणा में राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ विजय संकल्प यात्रा निकाली। मगर परिणाम में कांग्रेस पार्टी बिहार में विगत चुनाव की अपेक्षा एक तिहाई सीट पर सिमट गई और हरियाणा में भी भाजपा को अपने इतिहास में सर्वाधिक सीट मिल गया था। राहुल गांधी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को मजबूत करने वास्ते पिछले दिनों भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकली थीं। मगर उनकी ये यात्राएं महज दिखावा बनकर रह गई। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी की यात्राओं का कोई लाभ पार्टी को नहीं मिला।

खुद को पार्टी नेता घोषित करवाने के लिए राहुल गांधी ने की यात्रा

लोकसभा चुनाव से पूर्व राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा तथा भारत जोड़ो न्याय यात्रा नाम से दो यात्रा निकली थी। ये दोनों यात्राएं एक-दूसरे की पूरक थीं। इन यात्राओं का उद्देश्य केवल राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में स्थापित करने के लिए बनाई गई थी। यात्राएं निकालने से पहले कांग्रेस पार्टी असंतोष से ग्रसित थी और पार्टी को पुनर्जीवित करने के तरीके खोजने के लिए पार्टी में राहुल गांधी के विरोधियों ने एक जी-23 समिति का गठन किया था। दूसरे शब्दों में कहें तो जी-23 समिति का मकसद गांधी वंश और खासकर राहुल गांधी से पार्टी को मुक्त करना था। जी-23 के अवसाद को नकारने और पार्टी के भीतर अपने विरोधियों को मात देने के लिए राहुल गांधी ने ये यात्राएं निकाली थी। उनकी यात्राओं में भाजपा को चुनौती देने के लिए कम, बल्कि अपनी पार्टी के भीतर अपने विरोधियों को चुनौती देने के लिए मुख्यतः की गई थी।

राहुल गांधी की बहुप्रचारित यात्राओं के बाद भी 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन पिछले दो लोकसभा चुनावों 2014 और 2019 के समान ही है।

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का तुलनात्मक प्रदर्शन

लेखाचित्र स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की विजेता और उपविजेता सीटें 260 से 270 सीटों के बीच रही हैं।

राहुल गांधी की ये यात्राएं भाजपा के लिए साबित हुईं वरदान

वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी की यात्राएं भाजपा के लिए बड़ी ताकत बन गई थी। राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान ओडिशा में 4 दिन बिताए और 341 किमी की यात्रा की थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव दोनों में बुरी तरह हार गई थी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 0.88 प्रतिशत गिर गया था। ओडिशा में कांग्रेस पार्टी को 2024 में 2019 की तरह ही सिर्फ कोरापुट लोकसभा की सीट ही मिल सकी थी। लोकसभा के साथ ही हुए ओडिशा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की 5 सीटें बढ़ीं, लेकिन उसके वोट शेयर में 2.80 फीसदी की गिरावट आई थी।

ओडिशा में राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा दो जिलों झारसुगुड़ा और सुंदरगढ़ जिलों से होकर गुजरी थी और इन दोनों जिलों में विधानसभा की 9 सीटें हैं और कांग्रेस पार्टी को 2019 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन के समान ही 2024 के विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट ही मिल सकी थी। ये दोनों जिले बारगढ़ और सुंदरगढ़ लोकसभा सीटों के अंतर्गत आते हैं। दोनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी के वोट प्रतिशत में 2024 के लोकसभा चुनाव में 2019 के अपेक्षा कमी आयी थी। 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा में 14 सीटें जीतीं और 12 सीटों पर उपविजेता रही। वहीं 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 9 सीटें जीतीं और 31 सीटों पर उपविजेता रही थी। 2019 के विधानसभा चुनाव में ओडिशा में कांग्रेस पार्टी 40 सीटों पर सीधे मुकाबले में थी, जो 2024 में घटकर केवल 26 सीटें रह गई थी। ओडिशा में 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर लगभग 3 प्रतिशत कम हो गया था।

पनौती साबित हुई राहुल की भारत जोड़ो यात्रा

राहुल गांधी की बहुप्रचारित भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए लेकिन विधानसभा में कांग्रेस पार्टी की सीटों की संख्या 4 सीटों से घटकर एक पर आ गई थी। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का वोट 2024 में 2019 की अपेक्षा 11.29 प्रतिशत कम हो गया था। इस प्रदेश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पापुम पारे जिले से होकर गुजरी और जिले की तीन विधानसभा सीटों में से दो पर भाजपा ने निर्विरोध जीत हासिल की थी। जिले की सागली विधानसभा की  सीट 2019 में कांग्रेस पार्टी के खाते में थी लेकिन 2024 में भाजपा ने यह सीट निर्विरोध जीत लिया था. दोईमुख विधानसभा  सीट पर कांग्रेस पार्टी ने चुनाव लड़ा था, और कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर काफी कम हो गया था। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने 2019 में 4 सीटें जीतीं और 21 सीटों पर उपविजेता रही। जबकि 2024 में पार्टी 1 सीट जीती और 3 सीटों पर उपविजेता रही। इसलिए राहुल गांधी की यात्रा के बाद अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की हिस्सेदारी 2019 में 25 सीटों से घटकर 2024 में 4 सीटों पर आ गई।

इन राज्यों में कांग्रेस का नहीं है कोई प्रतिनिधित्व

आंध्र प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली , नागालैंड, मेघालय और सिक्किम ऐसे प्रदेश है, जहां कांग्रेस पार्टी का राज्य विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। आंध्र प्रदेश में लगातार दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी अपना खाता नहीं खोल पाई। यह कांग्रेस पार्टी की विडंबना है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी 175 विधानसभा सीटों में से किसी पर भी सीधे मुकाबले में नहीं आ सकी। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का ऐसा प्रदर्शन तब हुआ, जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 4 दिनों तक आंध्र प्रदेश में रही थी। राहुल गाँधी के यात्रा के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी 175 विधानसभा सीटों में से किसी पर भी सीधे मुकाबले में नहीं थी।

यात्रा के ठीक बाद हुए उपचुनावों का विश्लेषण करें तो यह पार्टी के लिए हानिकारक रहा था। तेलंगाना से राहुल गांधी की यात्रा के ठीक बाद कांग्रेस पार्टी के विधायक के इस्तीफे के कारण मुनुगोडे विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था। लेकिन, उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी। यह तब हुआ था जबकि, तेलंगाना में 2018 के विधानसभा चुनाव में मुनुगोडे सीट पर कांग्रेस पार्टी ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर के साथ शानदार जीत हासिल की थी।

पंजाब में भारत जोड़ो यात्रा के क्रम जालंधर लोकसभा सीट से दूसरी बार के सांसद संतोख सिंह की यात्रा में शामिल रहने के दौरान बीमारी के कारण निधन हो गया था। संतोख सिंह के निधन के कारण हुए उपचुनाव में  कांग्रेस पार्टी ने दिवंगत सांसद संतोख सिंह की विधवा करमजीत कौर को उम्मीदवार बनाकर सहानुभूति लहर का फायदा उठाने का प्रयास किया था, मगर इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी इस सीट पर बुरी तरह से चुनाव हार गई थी। कांग्रेस पार्टी 1999 से लगातार यह सीट जीतती आ रही थी फिर भी 2023 के उपचुनाव में हार गई थी। अतएव राहुल गांधी का राजनीतिक यात्रा कांग्रेस पार्टी से अधिक उनके विरोधियों के लिए लाभप्रद होता हैं।

 

Topics: राहुल गांधीभारत जोड़ो यात्राभारत जोड़ो न्याय यात्राकांग्रेस पार्टी हारराहुल गांधी यात्रा विफल
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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