अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब में पांच सिंह साहिबान की हुई बैठक में विधानसभा के सभी सिख विधायकों व पूरी कैबिनेट को 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया है। पंजाब सरकार की ओर से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ बनाए गए कानून में अभी संशोधन नहीं किया गया है।
सीएम मान को बताया गुरुद्रोही व पंथ विरोधी
सिख पंथ के सर्वोच्च तख्त अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ करार देने की घोषणा की। यह फैसला उस वायरल वीडियो से जुड़ी फोरेंसिक जांच रिपोर्टों के आधार पर लिया गया, जिसे लेकर कई महीनों से विवाद चल रहा था। अकाल तख्त के अनुसार दो फोरेंसिक एजेंसियों की रिपोर्ट में वीडियो को वास्तविक बताया गया है।
दावा, फोरेंसिक लैब में सही मिला वीडियो
अकाल तख्त में संबोधन के दौरान जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज ने कहा कि वीडियो की जांच के लिए दो मान्यता प्राप्त फोरेंसिक एजेंसियों की सेवाएं ली गई थीं। उनके अनुसार दोनों रिपोर्टों में वीडियो के साथ किसी प्रकार की एडिटिंग, छेड़छाड़ या एआई जनरेशन के संकेत नहीं मिले। जत्थेदार ने कहा कि रिपोर्टों पर विचार-विमर्श के बाद पांच सिंह साहिबानों की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई और सामूहिक राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।
क्या है विवादित वीडियो का मामला
यह विवाद अक्टूबर 2025 में सामने आया था, जब एक एनआरआई द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया गया था। वीडियो में कथित तौर पर एक व्यक्ति को हाथ में गिलास लिए सिख धार्मिक चित्रों के सामने खड़ा दिखाया गया था। शिरोमणि अकाली दल और अन्य सिख संगठनों ने उस समय इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की थी। इसके बाद मामला श्री अकाल तख्त तक पहुंचा और मुख्यमंत्री से भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।
सीएम ने बताया था फर्जी वीडियो
जनवरी 2026 में श्री अकाल तख्त के समक्ष पेश होने के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस वीडियो को फर्जी और एआई जनरेटेड बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी छवि खराब करने के लिए वीडियो प्रसारित किया गया है। उस समय उन्होंने स्वयं वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने की बात कही थी और कहा था कि उन्हें किसी भी जांच से परहेज नहीं है।
आप ने उठाए पहचान को लेकर सवाल
अकाल तख्त के ताजा फैसले के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई। पार्टी प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि यदि किसी रिपोर्ट में वीडियो को वास्तविक बताया गया है, तब भी यह अलग सवाल है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन है। उन्होंने कहा कि वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान, दोनों अलग-अलग विषय हैं। पार्टी का कहना है कि केवल वीडियो के वास्तविक होने से यह साबित नहीं होता कि उसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान ही दिखाई दे रहे हैं।
पंजाब की राजनीति में बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में बहस और तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को मुख्यमंत्री की छवि से जोड़ रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक रंग दिए जाने का आरोप लगा रही है। अमृतसर में हुई इस घोषणा के बाद अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। मामले को लेकर आने वाले दिनों में और बयानबाजी तथा राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।















