बांग्लादेश में श्रीराम प्रतिमा निर्माण पर रोक: हिंदू अस्तित्व और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठते सवाल
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बांग्लादेश में श्रीराम प्रतिमा निर्माण पर रोक: हिंदू अस्तित्व और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठते सवाल

बांग्लादेश में श्रीराम की प्रतिमा के विरोध में निकाले गए जुलूस में श्रीराम की तस्वीर को मारी चप्पल: सल्तनत काल से लेकर अब तक हिंदुओं से घृणा की यात्रा

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jun 13, 2026, 08:43 pm IST
inविश्व, मत अभिमत
Bangladesh Ram Mandir Controversy Gaibandha Islamists Rally Against Ram Murti

बांग्लादेश में अंततः श्रीराम प्रतिमा के निर्माण को निलंबित कर दिया गया है। यह निलंबन अपेक्षित ही था। क्योंकि जिहादी तत्व बांग्लादेश में हावी हैं और वे नहीं चाहते हैं कि हिंदुओं का अस्तित्व भी बांग्लादेश में रहे। और यही जिहादी तत्व बांग्लादेश में सरकार बदलने के पीछे थे।

शेख हसीना का विरोध केवल शेख हसीना का विरोध नहीं था, बल्कि वह तो देश की पूर्वी पाकिस्तान वाली छवि को वापस लाने का प्रयास था। अवामी लीग अब सत्ता ही नहीं, बल्कि देश से भी बाहर है और इन दिनों बीएनपी की सरकार है। बीएनपी की छवि जिहादी तत्वों के आगे घुटने टेकने की रही है।

मगर वह इतनी जल्दी घुटने टेक देगी, शायद यह लोगों को विश्वास नहीं था। जहां पर यह प्रतिमा बन रही है, वह हिंदुओं की भूमि है और हिंदू ही अपने पैसे से इस प्रतिमा और परिसर में अनेक प्रतिमाओं का निर्माण करवा रहे हैं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में यह आवश्यक है कि वहां पर हर धर्म के लोग बिना किसी भय के अपने आराध्य के लिए प्रार्थना स्थल बनवा सकें, मगर शायद बांग्लादेश में अब यह संभव नहीं है क्योंकि अब वहां हिंदुओं को पूरी तरह से मिटाने की बात की जा रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विरोध प्रदर्शन

सोशल मीडिया पर कई धमकी भरे वीडियो वायरल हैं, मगर जो सबसे हैरान करने और स्तब्ध करने वाला वीडियो आया है, वह है श्रीराम की प्रतिमा के विरोध में निकाली गई रैली में प्रभु श्रीराम के चित्र को चप्पल से पीटने का। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह बहुत ही शर्म की बात होनी चाहिए कि वहां के अल्पसंख्यकों के आराध्य के साथ इस प्रकार का व्यवहार वहां की बहुसंख्यक आबादी करे, मगर फिर यह बांग्लादेश है! लगभग हर शर्म से परे!

This video is from from the #Gaibandha district of #Bangladesh.

Islamists are rallying against the construction of a Ram Murti.

They hate Hindus so much that they slapped on the photo of Prabhu Ram with shoes.

This is the reason that Hindu minorities are being targeted and… pic.twitter.com/XSOg5EnViU

— Hindu Voice (@HinduVoice_in) June 13, 2026

इस वीडियो में दिख रहा है कि इस्लामिस्ट राम प्रतिमा के निर्माण के विरोध में रैली कर रहे हैं। और उन्हें हिंदुओं से इस सीमा तक घृणा है कि वे प्रभु श्रीराम के चित्र को जूतों से मार रहे हैं।

इसी घृणा का परिणाम है कि बांग्लादेश में हर कोने में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं और चूंकि जिहादी तत्व ही हावी हैं, इसलिए वहां शायद ही कहीं सुनवाई होती हो।

बांग्लादेश में मंदिरों और देवी-देवताओं के अपमान का इतिहास

बांग्लादेश में आज ही श्रीराम की प्रतिमा के निर्माण को लेकर विरोध हो रहा हो, ऐसा नहीं है। जब से इस सोच ने भारत में कदम रखा था, तभी से भारत के तमाम मंदिर इस सोच के निशाने पर रहे हैं।

यह वही सोच है जो भोपाल में वाग्देवी के मंदिर को मस्जिद बताती है, यह वही सोच है जो काशी विश्वनाथ में महादेव को वजू का स्थान बताती है और उस वेदना का अनुभव भी नहीं करती, जो महादेव के वजू वाले स्थान की कल्पना से ही आम हिंदू को होती होगी।

मगर वह हंसते हुए वजू भी करता रहा और यह कहता भी रहा कि वहां तो “फव्वारा है!” यह वही बेशर्म सोच है।

मगर यह सोच हिंदुओं के अस्तित्व से घृणा करती है और उनके धर्मस्थलों को तोड़कर अपना नाम देती है, फिर चाहे वह कुतुबमीनार हो या फिर अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा अथवा मथुरा में जन्मभूमि मंदिर। हर जगह मंदिरों के अस्तित्व को मिटाने के लिए यह सोच हावी है।

मंदिरों के ध्वस्तीकरण और ऐतिहासिक संदर्भ

अभी इंटरनेट का युग है, इसलिए दस्तावेज तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं। परंतु जब इंटरनेट नहीं था, कंप्यूटर नहीं थे, तब भी ध्वस्तीकरण को रिकॉर्ड किया गया है, क्योंकि संरचना को किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती। जो हिंदू मंदिरों का शिल्प है, वह समझ में आ जाता है, फिर चाहे उस पर कितनी भी मस्जिदें बना दी जाएं।

ढाका का ढाकेश्वरी मंदिर भी कई बार तोड़फोड़ का शिकार हुआ है। इस ऐतिहासिक मंदिर को भी मुगलों तथा अन्य लोगों ने तोड़ने और लूटने का प्रयास किया।

List of Hindu Temples Converted to Mosques in Bangladesh पृष्ठ पर कई ऐसे मंदिरों की सूची है, जिन्हें या तो तोड़ दिया गया या फिर उनके स्थान पर मस्जिद बना दी गई। इसमें बंगाल में बनी आदिना मस्जिद भी है, जो आदिनाथ मंदिर के अवशेषों पर और उनसे प्राप्त सामग्री से निर्मित बताई जाती है।

सिलहट में शाह जलाल की मस्जिद और दरगाह हिंदू मंदिरों को तोड़कर या उनके अवशेषों से बनी बताई जाती है। जो आज संख्या में अधिक होकर श्रीराम के चित्र के साथ यह कर रहे हैं, वे दरअसल अपने भीतर से अभी भी उस पहचान से घृणा करते हैं, जो उनकी हिंदू जड़ों को दिखाती है।

पहचान, इतिहास और धार्मिक विरासत का प्रश्न

यह पहचान के प्रति घृणा है। यह अपने ही अस्तित्व के प्रति घृणा है और यह ऐसी घृणा है, जिसका कोई ठोस आधार भी नहीं है। यही वह घृणा है जिसने ढाका में यशो माधव मंदिर को तुड़वा दिया था और यही वह सोच है जो आज उस अधबनी प्रतिमा को मिटा देना चाहती है।

यह वही औरंगजेब की सोच है, जिसकी सेना ने वर्तमान के बांग्लादेश में कई मंदिरों को तुड़वाया था और गर्भगृहों को अपवित्र किया था।

यदि आज उस भूमि पर, जहां भारत के विभाजन अर्थात हिंदुओं के साथ न रहने के आधार पर देश तोड़ने की नींव डाली गई थी और जहां मुस्लिम लीग की स्थापना हुई थी, उसी भूमि पर हिंदुओं के देवताओं को लेकर घृणा दिखाई देती है, तो यह कोई नई बात नहीं है।

बांग्लादेश सरकार की भूमिका पर उठते प्रश्न

देखना होगा कि जितना त्वरित कदम बांग्लादेश की नव-निर्वाचित सरकार ने प्रभु श्रीराम की प्रतिमा के निर्माण को रोकने के लिए उठाया है, उतना ही त्वरित कदम इन अपराधियों को दंडित करने के लिए उठाती है या नहीं, क्योंकि इन्होंने देश के अल्पसंख्यक समुदाय के आराध्य का अपमान किया है।

या फिर बांग्लादेश में बेअदबी का कानून केवल मुसलमानों के लिए है?

Topics: शेख हसीना बीएनपी सरकारInternational Crime BreakingPanchjanya newsबांग्लादेश समाचारHindus in BangladeshAttacks On HindusBangladesh Ram Mandir ControversyGaibandha District Bangladeshप्रभु श्रीराम चित्र का अपमान
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