अमेरिकी झूठ पर Jaishankar का तीखा वार, अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों के मारे जाने पर Rubio को फोन पर सुनाई खरी खरी
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अमेरिकी झूठ पर Jaishankar का तीखा वार, अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों के मारे जाने पर Rubio को फोन पर सुनाई खरी खरी

जयशंकर ने बिना लागलपेट के रूबियो को तथ्यों से परिचित कराया और भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका ऐसा करना भारत की विदेश नीति और कूटनीति की वह ताकत दिखाता है, जिसे आज पूरा विश्व मान रहा है।

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Jun 13, 2026, 12:32 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
जयशंकर (बाएं) ने रूबियो को फोन पर सुनाई खरी खरी (File Photo)

जयशंकर (बाएं) ने रूबियो को फोन पर सुनाई खरी खरी (File Photo)

ओमान की खाड़ी के पास शिनास पोर्ट के निकट 10 जून को अमेरिका द्वारा एक वाणिज्यिक जहाज पर दागी मिसाइलों से तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु को लेकर भारत ने विभिन्न मंचों से तीखा विरोध जताया है। इसके साथ ही, उस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और तीखा होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होशियारी दिखाते हुए इस घटना की जिम्मेदारी ईरान के माथे मढ़ने की चाल चली है, लेकिन वे तथ्यों को कैसे झुठला सकते हैं! ईरान ने अमेरिका के तमाम आरोपों को बेबुनियाद और राजनयिक रूप से अस्वीकार्य करार दिया है। भारत ने विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए अमेरिका से घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

क्या हुआ था ओमान में?

गत 10 जून को ओमान तट से थोड़ी ही दूरी पर शिनास पोर्ट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइलों से हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। अमेरिकी प्रशासन ने बिना देर किए इस हमले के लिए ईरान या ईरानी समर्थक समूहों को जिम्मेदार ठहराया और का कि ये हमला “किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं” है। ए अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के विरुद्ध है, ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

10 जून को ओमान तट से थोड़ी ही दूर अमेरिकी मिसाइल हमले का शिकार हुआ वाणिज्यिक जहाज

अमेरिका द्वारा जारी विज्ञप्तियों को देखें तो उनमें लिखा है कि ‘रक्षा के दायरे में रहते हुए अथवा सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई की गई।’ अमेरिकी प्रवक्ता ने बताया कि इस आपरेशन में कुछ ठिकानों और लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था, जिनके संबंध ईरान या उसके सशस्त्र सहयोगियों से थे।

भारत में आक्रोश

उक्त घटना के बाद से न सिर्फ भारत सरकार आक्रोश में है बल्कि आम भारतीय भी अमेरिका की इस हिंसक कार्रवाई के प्रति अपना गुस्सा प्रदर्शित कर रहे हैं। इस संबंध में तीखी राजनयिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। मारे गए तीनों भारतीय नाविकों के परिजनों को भारत सरकार की तरफ से तत्काल सहायता और कांसुलर मदद प्रदान की गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मृतक नाविकों के परिवारों के साथ संपर्क बनाया हुआ है और उन्हें आवश्यक सहायता दी जा रही है। देश में समुद्री सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक ही है।

कड़ा विरोध और कूटनीतिक संवाद

जैसा पहले बताया, भारत ने इस घटना, विशेषकर अमेरिकी कार्रवाई के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि किसी भी विदेशी शक्ति द्वारा बिना पर्याप्त सार्वजनिक और पारदर्शी सबूत के किसी तीसरे देश को आरोपित करना और उसके आधार पर सैन्य कार्रवाई करना किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात करके भारत की तीखी आपत्ति दर्ज कराई। जयशंकर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर इस चर्चा का उल्लेख करते हुए लिखा, ”व्यापारिक नौवहन के लिए इस तरह की जानलेवा कार्रवाई किसी तरह उचित नहीं ठहराई जा सकती और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का और सतर्कता से पालन करना चाहिए।”

Spoke to US Secretary of State Marco Rubio this evening. I reiterated India’s strong protest at the attacks by the US Navy in the Gulf that killed three Indian mariners. Such lethal actions against commercial shipping are not justified.

— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) June 12, 2026

जयशंकर ने रूबियो से साफतौर पर कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से पहले पारदर्शी जांच, तथ्यों का सार्वजनिक खुलासा और संयुक्त रूप से संवेदनशील जानकारी का आदान-प्रदान करना आवश्यक होता है। भारत सरकार की ओर से उन्होंने यह भी कहा कि इलाके में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति और सामुद्रिक वाणिज्य के लिए भारी जोखिम हो सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और व्यापारिक शिपिंग रूट्स पर पड़ेगा।

क्या कहता है ईरान?

ईरान ने अमेरिका की आरोप की भर्त्सना करते हुए उसे ‘बिना ठोस प्रमाण’ का आरोप करार दिया और कहा कि ऐसे आरोप क्षेत्रीय शांति में योगदान नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया और कहा कि किसी भी जवाबी कार्रवाई के बारे में जानकारी न्यायिक या संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से ली जानी चाहिए।

यूरोपीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की ​है तथा क्षेत्रीय तनाव घटाने के लिए संयम बरतने का आह्वान किया है। कई देशों ने समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बनाए रखने और नागरिक जीवन की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।

क्या हैं राजनयिक निहितार्थ?

यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच सहयोग-क्षेत्र और भरोसे की कमी बनी रहती है तो खाड़ी क्षेत्र में बड़े देशों के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है। भारत ने पारंपरिक तटस्थ और संतुलित नीति अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह बिना स्वतंत्र और पारदर्शी तथ्यों के किसी भी पक्ष का एकतरफा समर्थन नहीं करेगा, साथ ही उसने अपने नागरिकों की सुरक्षा की मांग फिर से उठाई है।

दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का दुनिया की थानेदारी करने का अक्खड़ रवैया ही ट्रंप को ऐसे बेबुनियाद जवाब देने को ​बाधित कर गया होगा। अपनी गलत हरकतों को दूसरे के मत्थे मढ़ देने का उसका यह पैंतरा भारत सरकार अच्छे से जानती है। विशेषज्ञ कहते हैं, इसीलिए जयशंकर ने बिना लागलपेट के रूबियो को तथ्यों से परिचित कराया और भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका ऐसा करना भारत की विदेश नीति और कूटनीति की वह ताकत दिखाता है, जिसे आज पूरा विश्व मान रहा है।

Topics: भारतHormuzईरानRubioअमेरिकाAmericawarIranIndiadiplomacyJaishankarजयशंकरomanUS-India relations
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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