गत 5 जून को नई दिल्ली में ‘निरोगता के सूत्र : गुरबाणी एवं श्रीमद्भगवद्गीता के आलोक में’ पुस्तक का लोकार्पण हुआ। इसमें स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवन के सूत्रों को समाहित किया गया है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि किसी का अहित न करना ही सबसे बड़ी निरोगता है। अहित करने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर ईर्ष्या, क्रोध और नकारात्मक भावों को स्थान देना पड़ता है, जो अंततः तन और मन दोनों को अस्वस्थ बनाते हैं।
उन्होंने जीवन को एक मिशन के रूप में जीने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ विचारों का होना अनिवार्य है। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने कहा कि ‘स्व’ का वास्तविक अर्थ ईश्वर है और मनुष्य का लक्ष्य अपने भीतर स्थित उस दिव्यता को पहचानना होना चाहिए। जहां ‘स्व’ है, वहीं वास्तविक स्वास्थ्य और निरोगता है।
आध्यात्मिक गुरु बाबा भूपिंदर सिंह पटियाला ने कहा कि जब तक मनुष्य अपने भीतर नहीं झांकता, तब तक वास्तविक निरोगता प्राप्त नहीं कर सकता। पुस्तक के लेखक हैं डॉ. शाम लाल कठपालिया, जो संघ के स्वयंसेवक हैं। इनका सहयोग गीता कठपालिया ने किया है। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी, दिल्ली प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
















