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“हिन्दू मजबूत होगा तो राष्ट्र मजबूत होगा” : लखनऊ में संघ कार्यकर्ता विकास वर्ग समापन में रामदत्त चक्रधर जी का बड़ा संदेश

लखनऊ के सरस्वती कुंज निराला नगर में आरएसएस के 20 दिवसीय 'कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम' का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त चक्रधर जी ने वर्ष 2026 के ऐतिहासिक महत्व और डॉ. हेडगेवार के 'हिन्दू राष्ट्र' दृष्टिकोण पर रखे ओजस्वी विचार

Published by
Shivam Dixit

लखनऊ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र द्वारा आयोजित 20 दिवसीय ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम’ (RSS Karyakarta Vikas Varg) का भव्य समापन समारोह बुधवार (अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी) को निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में संपन्न हुआ।

 

इस गरिमामयी समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त चक्रधर जी और मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा उपस्थित रहे। दोनों विभूतियों ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता को लेकर स्वयंसेवकों का ओजस्वी मार्गदर्शन किया।

वर्ष 2026: चार ऐतिहासिक वर्षगाँठों का भव्य संगम

अपने संबोधन में सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त चक्रधर जी ने बताया कि वर्ष 2026 राष्ट्रीय और सांस्कृतिक दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और युगांतकारी वर्ष है। उन्होंने इस वर्ष को चार महान ऐतिहासिक घटनाओं का संगम बताया-

ऐतिहासिक घटना / प्रतीकवर्ष 2026 में ऐतिहासिक महत्व
भगवान बिरसा मुंडाअंग्रेजों से धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ने वाले महानायक की 150वीं जन्म वर्षगांठ
हिन्द की चादर गुरु तेगबहादुर जीधर्म और राष्ट्र रक्षा के लिए उनके अमर बलिदान की 350वीं वर्षगांठ
राष्ट्रीय गीत ‘वंदेमातरम’राष्ट्रचेतना का शंखनाद करने वाले अमर गीत की 150वीं वर्षगांठ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित संगठन के राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष (शताब्दी वर्ष)

“भारत हिन्दू राष्ट्र है” — डॉ. हेडगेवार का दृष्टिकोण

श्री चक्रधर जी ने संघ की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि 1925 में मोहिते के बाड़े से जिस संघ की शुरुआत डॉ. हेडगेवार जी ने अकेले की थी, आज उसकी दैनिक शाखाओं की संख्या 83 हजार से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना के समय जब लोग डॉ. साहब के इस विचार का उपहास उड़ाते थे, तब उन्होंने सीना तानकर कहा था—

“मैं, केशव बलिराम हेडगेवार, कहता हूँ कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है।”

“संघ एक वैचारिक प्रवाह है। संघ का स्पष्ट मानना है कि यह राष्ट्र हिन्दू समाज का है। यदि हिन्दू मजबूत होगा तो राष्ट्र मजबूत होगा, और यदि हिन्दू कमजोर होगा तो राष्ट्र भी कमजोर होगा। संघ ने हिन्दू समाज में सुप्त पड़े आत्मबोध को जगाने का काम किया है।” – श्री रामदत्त चक्रधर

शाखा पद्धति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा की गौरवमयी परंपरा

सह सरकार्यवाह जी ने स्वयंसेवकों को समाज-केंद्रित बनने का आह्वान करते हुए संघ के सेवा कार्यों और इतिहास के कई प्रसंग साझा किए:

  • ऐतिहासिक संकटों में भूमिका: देश के विभाजन के समय स्वयंसेवकों ने प्राणों पर खेलकर हजारों हिंदुओं की रक्षा की। 1962 के चीन युद्ध में सेना की सहायता की और रक्तदान किया, जिससे प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने का निमंत्रण दिया। कोरोना काल में भी स्वयंसेवकों ने अतुलनीय सेवा की।
  • प्रतिबंधों का मुकाबला: गांधी जी की हत्या के झूठे आरोप और आपातकाल (18 महीने) के दौरान संघ पर प्रतिबंध लगे, लेकिन लाखों कार्यकर्ताओं के सत्याग्रह और वैचारिक शक्ति के सामने सरकार को झुकना पड़ा। आज ‘Join RSS’ के माध्यम से हर महीने 38 हजार से अधिक लोग संघ से जुड़ रहे हैं।
  • संवैधानिक और राष्ट्रीय प्रतीक: उन्होंने रेखांकित किया कि देश में सर्वोच्च न्यायालय, थलसेना, नौसेना, वायुसेना, चुनाव आयोग और दूरदर्शन के बोध-वाक्य भारतीय वाङ्मय (संस्कृत ग्रंथों) से लिए गए हैं, न कि किसी बाहरी धार्मिक ग्रंथ से।
  • जातिभेद से परे समरसता: संघ ने अपनी ‘एक सह-सम्पत’ पद्धति से समाज की सभी जातियों को एक साथ खड़ा किया है। महात्मा गांधी भी वर्धा के संघ शिविर में बिना जाति-भेद के सभी स्वयंसेवकों को एक साथ रहते देख बेहद प्रभावित हुए थे।

पर्यावरण संरक्षण और भारतीय जीवन-मूल्य

चक्रधर जी ने वर्तमान दौर में टूटती परिवार व्यवस्था और पर्यावरण क्षरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, रवींद्रनाथ ठाकुर और स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए कहा कि गर्व से हिंदू कहने के लिए समाज में संवेदनशीलता होनी चाहिए। उन्होंने योजनाबद्ध रूप से किए जा रहे मतांतरण (धर्म परिवर्तन) को रोकने और स्वदेशी जीवन-मूल्यों (अपना नववर्ष, अपना भोजन, अपना जन्मदिन) को अपनाने पर बल दिया।

“यह समापन नहीं, राष्ट्र निर्माण यज्ञ का प्रकटीकरण है” — पद्मश्री रामसरन वर्मा

समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री रामसरन वर्मा जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि 20 दिनों का यह प्रशिक्षण केवल एक वर्ग का समापन नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में स्वयंसेवकों की आहुति का प्रकटीकरण है। उन्होंने सभी प्रशिक्षित स्वयंसेवकों से समाज में अलगाववाद को समाप्त कर एकजुटता लाने और देश, धर्म व संस्कृति की रक्षा के दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने की आशा जताई।

आंकड़ों में समझिए कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम की संख्या

इस वर्ष आयोजित हुए इस प्रशिक्षण वर्ग की मुख्य सांख्यिकी और विशेषताएं निम्नलिखित रहीं:

  • कुल प्रशिक्षित स्वयंसेवक: 289 शिक्षार्थी
  • प्रशिक्षण की अवधि: 20 दिवसीय सघन आवासीय वर्ग
  • शामिल प्रांत (पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र): अवध, कानपुर, काशी और गोरखपुर प्रांत के विभिन्न जनपद।
  • प्रशिक्षण के विषय: स्वयंसेवकों को शारीरिक, बौद्धिक, व्यवस्थापन, सेवा, सम्पर्क, प्रचार एवं संगठनात्मक विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
  • कुटुम्ब-सहभोज कार्यक्रम: 7 जून को आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षार्थियों के लगभग 200 परिवारों ने भाग लिया, जिसने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के अंतर्गत ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ (Family Awakening) की भावना को सुदृढ़ किया।

समारोह में संघ के अखिल भारतीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय अधिकारियों के साथ-साथ लखनऊ के शिक्षाविद्, वाइस चांसलर, न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सांसद और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक और मातृशक्ति भारी संख्या में उपस्थित रहे।

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