जिनेवा/नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (ILO) के 114वें सत्र में भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन केंद्र, भारतीय मजदूर संघ (BMS) के प्रतिनिधि बोजी सुरेंद्रन ने भारतीय श्रमिकों का पक्ष मजबूती से रखा। 9 जून 2026 को ‘श्रमिक प्रतिनिधि’ (Worker Delegate) के रूप में सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गिग अर्थव्यवस्था और वैश्विक श्रम चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की उपलब्धियों और चिंताओं को विश्व पटल पर रखा।
सामाजिक सुरक्षा में भारत ने गाड़े झंडे, मिली वैश्विक मान्यता
सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि ने भारत के आर्थिक परिवर्तन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक आर्थिक विकास को दिशा दे रहा है। उन्होंने मंच से एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि भारत को श्रमिकों के लिए दुनिया का सबसे अधिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्राप्त करने के लिए वैश्विक मान्यता मिली है।
- देश के 64% कार्यबल को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जा चुका है।
- मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित ‘विश्व सामाजिक सुरक्षा शिखर सम्मेलन’ में अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (ISSA) द्वारा भारत को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
“केवल रोजगार नहीं, गुणवत्तापूर्ण नौकरियां जरूरी”
वैश्विक बेरोजगारी के आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए बीएमएस प्रतिनिधि ने कहा कि दुनिया में 400 मिलियन (40 करोड़) से अधिक लोगों को प्रभावित करने वाली नौकरियों की कमी इस बात का प्रमाण है कि केवल रोजगार देना ही पर्याप्त नहीं है।
“अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अब गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा और कौशल विकास के समुचित अवसर मिल सकें।”
उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का भी जिक्र किया, जिसके कारण आपूर्ति श्रृंखला, श्रम गतिशीलता और MSME सेक्टर पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे संघर्ष के समय में ट्रेड यूनियनों की शांतिपूर्ण संवाद स्थापित करने की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
“AI इंसानों की सहायता के लिए है, उनकी जगह लेने के लिए नहीं”
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भविष्य के रोजगार पर आईएलओ के महानिदेशक की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए सुरेंद्रन ने स्पष्ट किया कि नई प्रौद्योगिकियों का उद्देश्य मानव की सहायता करना होना चाहिए, न कि उन्हें विस्थापित करना।
उन्होंने तेजी से बढ़ती प्लेटफॉर्म और गिग अर्थव्यवस्था (Gig Economy) से जुड़े श्रमिकों के अधिकारों की वकालत की। इस संदर्भ में उन्होंने भारत सरकार और कुछ राज्य सरकारों द्वारा गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के प्रयासों की खुले मंच से सराहना की।
श्रम कोई वस्तु नहीं, ‘श्रम बाजार’ की जगह ‘श्रम बल’ का हो इस्तेमाल
भाषण का सबसे प्रभावशाली हिस्सा श्रम से जुड़ी शब्दावली पर रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रम ‘मानव पूंजी’ (Human Capital) है, कोई वस्तु नहीं। उन्होंने “हायर एंड फायर” (Hire & Fire) जैसी पूंजीवादी प्रवृत्तियों की आलोचना करते हुए सभी सदस्य देशों से अपील की कि “श्रम बाजार” (Labour Market) जैसे विरोधाभासी और अपमानजनक शब्द का प्रयोग बंद किया जाए। इसके स्थान पर “श्रम बल” (Labour force) जैसे गरिमापूर्ण शब्द का उपयोग किया जाना चाहिए।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी
अंत में, आंतरिक और सीमा पार श्रम प्रवासन (Labour Migration) को एक बड़ी वैश्विक चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को अक्सर असुरक्षित रोजगार और कमजोर प्रवर्तन तंत्र का शिकार होना पड़ता है। उन्होंने दुनियाभर की सरकारों और श्रमिक संगठनों से सुरक्षित प्रवासन और लाभों की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने एक न्यायसंगत, समावेशी और मानव-केंद्रित कार्य व्यवस्था के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।











