काशी में चमत्कार! गंगा नदी से निकला विशालकाय शिवलिंग, उमड़ा जनसैलाब
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काशी : गंगा की गहराई से प्रकट हुए ‘नंदीश्वर महादेव’! मछुआरों ने की 200 किलो के विशालकाय शिवलिंग की खोज

2500 साल पुराना और मौर्यकालीन होने का दावा; 'नंदीश्वर महादेव' के दर्शन के लिए उमड़ रहे लोग, ASI को दी गई सूचना। देखिए पूरी रिपोर्ट

Written byवाराणसी संवाद सूत्रवाराणसी संवाद सूत्र — edited by Shivam Dixit
Jun 9, 2026, 06:21 pm IST
in भारत, उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति
Varanasi Ganga River 2 quintal Shivling found Mauryan Empire

वाराणसी। धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी) के सुजाबाद स्थित शक्ति घाट के पास गंगा नदी से करीब दो क्विंटल (200 kg) वजनी एक विशाल शिवलिंग मिलने से पूरे क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और उत्सुकता का माहौल है। शिवलिंग की प्राचीन बनावट और शैली को देखकर स्थानीय लोग व जानकार इसे मौर्यकालीन बता रहे हैं। मछुआरों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस शिवलिंग को गंगा की गहराई से बाहर निकाला है। मामले की संवेदनशीलता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए पुरातत्व विभाग (ASI) को भी इसकी सूचना दे दी गई है।

मछुआरों के जाल में फंसा महादेव का अद्‍भुत स्वरूप

जानकारी के अनुसार, सुजाबाद क्षेत्र के शक्ति घाट से करीब 200 मीटर दूर गंगा नदी में कुछ नाविक और मछुआरे अपनी नाव पर मछली पकड़ने के लिए जाल डाल रहे थे। इसी दौरान उनके जाल में कोई भारी वस्तु फंस गई।

  • आश्चर्यचकित रह गए लोग: जाल भारी होने पर जब मछुआरों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया और वस्तु को स्पर्श किया, तो वह शिवलिंग जैसा प्रतीत हुआ। काफी प्रयासों के बाद जब उसे नदी से बाहर निकाला गया, तो वह एक विशालकाय और प्राचीन शिवलिंग निकला।
  • सुरक्षित रखा गया: शिवलिंग को पूरी सावधानी के साथ बाहर निकालकर गंगा पार सुरक्षित स्थान पर रखा गया।
  • नंदीश्वर महादेव का स्वरूप: बाद में स्थानीय लोगों ने इसे ‘नंदीश्वर महादेव’ का स्वरूप मानते हुए पूरे सम्मान के साथ मां गंगा मंदिर परिसर के बाहर स्थापित कर दिया।

2500 वर्ष पुराना होने का अनुमान, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गंगा नदी से विशाल शिवलिंग मिलने की खबर जैसे ही आसपास के इलाकों में फैली, घाट पर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर के पुजारी लालबाबू निषाद ने जानकारी दी कि शिवलिंग पूरी तरह से सुरक्षित अवस्था में है और कहीं से भी खंडित नहीं है।

क्या है ऐतिहासिक दावा?

स्थानीय लोगों और कुछ जानकारों का मानना है कि यह कोई साधारण शिवलिंग नहीं, बल्कि प्राचीन काल की महत्वपूर्ण धरोहर है। दावों के अनुसार, इस शिवलिंग की बनावट मौर्यकाल (Mauryan Empire) से मेल खाती है और यह लगभग 2500 वर्ष पुराना हो सकता है। हालांकि, इसकी वास्तविक आयु को लेकर अभी आधिकारिक वैज्ञानिक पुष्टि होना बाकी है।

पुरातत्व विभाग को दी गई सूचना

इस प्राचीन शिवलिंग के ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया है। नमामि गंगे से जुड़े पदाधिकारी दर्शन निषाद ने बताया कि इस अद्भुत शिवलिंग के मिलने की आधिकारिक सूचना पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey of India) को दे दी गई है।

हालांकि, अभी तक विभाग की कोई टीम मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंची है। माना जा रहा है कि पुरातात्विक जांच (कार्बन डेटिंग और शैली अध्ययन) के बाद ही इस शिवलिंग के सटीक इतिहास, कालखंड और इसके आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल, यह स्थल शिवभक्तों के लिए आस्था का नया केंद्र बन गया है।

Topics: Varanasi Ganga River Shivling2 Quintal Shivling KashiMauryan Empire Shivling VaranasiNandishwar Mahadev SujabadASI Investigation Varanasi Shivling
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