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राजीव गांधी के ’15 पैसे’ वाले भ्रष्टाचार बनाम मोदी सरकार का DBT! जानिए कैसे टेक्नोलॉजी ने बदली देश के गरीबों की तकदीर

राजीव गांधी के '15 पैसे' वाले भ्रष्टाचार के जाल को तकनीक से किया गया ध्वस्त, सीधे खातों में पहुंचे ₹38 लाख करोड़। देखिए यह विशेष विश्लेषण

Published by
अभय कुमार

कांग्रेस की सरकारों में भ्रष्टाचार का बोलबाला था। यहाँ तक कि राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से ₹1 चलता है तो गरीब तक सिर्फ 15 पैसे पहुँचते हैं। 100 पैसे में से 85 पैसे बिचौलियों द्वारा आपस में बाँट लिए जाते थे। इस बँटवारे का बड़ा हिस्सा कांग्रेस पार्टी के नेताओं की जेब में भी जाता था। अतः कांग्रेस सरकार इस भ्रष्टाचार पर आँखें बंद रखती थी।

देश बिचौलियों के इस फैले जाल से परेशान था। किसी भी सरकारी योजना के लागू होने में सबसे बड़ी समस्या यही हुआ करती थी। वर्ष 2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह नीत यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार इन बिचौलियों का उपयोग अपनी जेब भरने के लिए किया करती थी।

डीबीटी के माध्यम से बिचौलियों की भूमिका समाप्त

लेकिन 2014 में भाजपा नीत एनडीए सरकार के सत्ता में आने के साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने तकनीक के माध्यम से उन बिचौलियों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।

मोदी सरकार के कार्यकाल में शुरू हुए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर – DBT) के जरिए वर्तमान में मोदी सरकार की योजनाओं के अंतर्गत भेजी जाने वाली 100 प्रतिशत राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुँच रही है।

12 दिसंबर 2014 को सरकार का कार्यकाल ग्रहण करने के लगभग छह महीने के भीतर ही मोदी सरकार ने डीबीटी का पूरे देश में विस्तार किया था। जहाँ पुरानी सरकारें गरीब के हक को बिचौलियों से नहीं बचा पा रही थीं, वहीं मोदी जी के दूरदर्शी दृष्टिकोण ने मात्र 10 वर्षों में तकनीक की मदद से 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की चोरी रोक दी है।

डिजिटल इंडिया से डेटा क्रांति का नया युग

वर्ष 2013 में 1 गीगाबाइट डेटा की कीमत ₹268 से अधिक थी। अब उसी डेटा की कीमत 5G रफ्तार के साथ घटकर केवल ₹8.31 से भी कम रह गई है। यानी 2013 के मुकाबले 96.91 प्रतिशत से भी अधिक की कमी आई है।

यह बदलाव वर्ष 2015 में शुरू की गई डिजिटल इंडिया पहल की देन है। भारत वर्ष 2026 में पूरे विश्व में सबसे सस्ते डेटा और सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क वाला देश बन चुका है।

पहले हमारा देश केवल उपभोक्ता हुआ करता था, जबकि वर्तमान में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। देश में एक समय केवल 500 स्टार्टअप हुआ करते थे, मगर उनकी संख्या अब 2 लाख के पार पहुँच चुकी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक भारत की डिजिटल इकोनॉमी देश की कुल जीडीपी का 20 प्रतिशत हिस्सा होगी।

मार्च 2014 में भारत में केवल 6.1 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन थे, जो अगस्त 2024 तक बढ़कर 106.5 करोड़ हो गए हैं। 25 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर से शुरू हुआ सफर आज 133 करोड़ के पार पहुँच चुका है। यह लगभग 432 प्रतिशत का भारी उछाल है।

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की बढ़ती ताकत

वर्ष 2014 में भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 81वें स्थान पर था, मगर 2024-25 की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत 38वें स्थान पर पहुँच चुका है। यह महज एक नंबर नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के बौद्धिक सामर्थ्य की ताकत को दर्शाता है।

टेक्नोलॉजी को जनता की सुविधा के अनुरूप बनाकर उसे लोकतंत्रीकरण की शक्ति के तौर पर इस्तेमाल करना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है।

पूरा विश्व भारत के यूपीआई द्वारा लाई गई डिजिटल पेमेंट क्रांति से अभिभूत है और उसे अपने यहाँ भी लागू करने के लिए प्रयासरत है। जून 2025 में आए यूपीआई के आँकड़ों के अनुसार, 18.39 बिलियन यूपीआई ट्रांजैक्शन के माध्यम से 24 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन करके भारत ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

आज दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट का लगभग 49 प्रतिशत अकेले भारत में हो रहा है।

मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस का विजन

प्रधानमंत्री मोदी जी का विजन “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” है।

इसके अंतर्गत उमंग मोबाइल एप्लीकेशन पर 240 विभागों की लगभग 2446 से अधिक सरकारी सेवाएँ 23 भाषाओं में उपलब्ध हैं। यह तकनीक का लोकतंत्रीकरण है, जो पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय है।

मोदी सरकार इस दिशा में और तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार ने टेक्नोलॉजी और एआई को और अधिक उन्नत तथा जनउपयोगी बनाने के लिए ₹1,300 करोड़ के इंडिया एआई मिशन को लागू करने की योजना बनाई है।

इसके अंतर्गत 38,000 जीपीयू का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को एआई मॉडल ट्रेन करने के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर न रहना पड़े।

इसके साथ ही भाषिणी जैसे एआई टूल्स के जरिए 22 भारतीय भाषाओं में रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा ने कार्यालयों और आम जनता के कार्यों को आसान बना दिया है। अब दूसरी भाषाओं के दस्तावेज़ों और लेखन को आसानी से अपनी भाषा में परिवर्तित कर जनता इसका बड़े पैमाने पर लाभ उठा रही है।

सेमीकंडक्टर मिशन और आत्मनिर्भर भारत

भारत के 90 प्रतिशत लैपटॉप और सर्वर में इस्तेमाल होने वाली चिप्स भारत के बाहर बनती थीं। लेकिन अब भारत 76,000 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर मिशन के साथ इस स्थिति को बदल चुका है।

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए वर्ष 2026-27 में 400 करोड़ रुपये का बड़ा बजट रखा गया है, जिससे इसे और गति मिल रही है।

अगले कुछ वर्षों में भारत चिप मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनने की ओर अग्रसर है। वर्ष 2014 में भारत अपनी आवश्यकता की लगभग 100 प्रतिशत चिप्स आयात करता था, जबकि वर्तमान में भारत अपने “मेक इन इंडिया” चिप्स का निर्माण कर रहा है।

अंतरिक्ष से तकनीक तक भारत का बढ़ता परचम

मोदी सरकार में देश धरती से लेकर चाँद तक अपना परचम लहरा रहा है।

वर्ष 2017 में एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड हो या चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव (साउथ पोल) पर सफल लैंडिंग, भारत अब अंतरिक्ष क्षेत्र में भी एक बड़ी शक्ति बनता जा रहा है।

आँकड़े गवाह हैं कि भारत अब रुकने वाला नहीं है। वर्तमान मोदी सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि स्वार्थ से ऊपर उठकर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर भारत के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कार्य कर रही है।

सेमीकंडक्टर मिशन से लेकर 6G विजन तक, मोदी सरकार का एकमात्र लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है।

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