प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नया इतिहास रचने जा रहे हैं. हम सभी को बताया गया हैं कि देश में सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले जवाहरलाल नेहरू हैं . मगर इस तथ्य को जानबूझकर छुपा लिया जाता हैं की वो 1947 में नेहरू चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नहीं बने थे. नेहरू 1952 में पहली बार चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने थे.
निर्वाचित प्रधानमंत्री के कार्यकाल में PM मोदी नेहरू से आगे
नरेंद्र मोदी 10 जून को लोकतान्त्रिक तौर पर चुने गए प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में ही पंडित नेहरू के 1952, 1957 और 1962 में लगातार तीन बार चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. अब मोदी निर्वाचित प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भी नेहरू को पीछे छोड़ने जा रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी 10 जून को प्रधानमंत्री पद पर निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर 4399 दिनों का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं जबकि जवाहरलाल नेहरू का चयनित प्रधानमंत्री के तौर पर 4398 दिन का कार्यकाल रहा था.
चुनौतियों के बीच मोदी युग
नेहरू और मोदी के कार्यकाल से अधिक अगर उनके देश के प्रति कार्यों का आकलन करे तो कई तथ्य सामने आता हैं. जब जवाहरलाल नेहरू को भारत का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला, तो कांग्रेस पार्टी केंद्र से लेकर राज्यों तक पूरी तरह सत्ता में थी.जवाहरलाल नेहरू के सामने राजनीतिक रूप से कोई बड़ी चुनौती उनके पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी नहीं था.दूसरी ओर, नरेंद्र मोदी को अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे समय के बाद देश में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. तब से मोदी युग के रूप में लोगों ने एक नए भारत को देखा है.
स्वच्छ भारत का सफल संकल्प
भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में एकमत स्वर कभी-कभार ही देखने को मिलता हैं. लेकिन पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर से लेकर दक्षिण पूर्व से लेकर पश्चिम देश के हर कोने में लगातार दौरा और जनसंपर्क करके देश में कई मुद्दों पर एक राय बनाने वाले पहले प्रधानमंत्री होने का गौरव हासिल किया है. उनकी हर अपील देश के हर कोने में एकसमान ढंग से सुनी जा रही हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व में ऐसा सम्मान कम ही नेताओं को मिलता हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राष्ट्र प्रेरक कार्य से ग्राम सभा से लेकर संसद तक एक नए भारत के निर्माण के लिए रिफॉर्म परफॉर्म एंड ट्रांसफार्म से जनता के बीच एक अमिट छाप छोड़ी है. आमजन के लिए मोदी जैसा नेता मिलना मुश्किल हैं क्योंकि प्रधानमंत्री बनते ही झाड़ू लेकर दिल्ली के मलिन बस्तियों की सफाई के लिए निकल पड़े थे. पहला संकल्प उन्होंने लाल किला से स्वच्छ भारत का ही लिया था. व्यक्तियों के व्यवहार परिवर्तन का यह दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन साबित हुआ हैं. मोदी युग में 2014 के बाद सिर पर मैला ढोने की प्रथा भी समाप्त हो गई हैं. हर घर में इज्जत घर परिवार की पहचान बन गई हैं. भारत से गंदगी को खत्म करने की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की हैं. जन भागीदारी से नरेंद्र मोदी ने महज 5 साल में भारत को खुले में शौच से पूर्णतया मुक्त करने वाले प्रधानमंत्री बने हैं.
बदली सोच, बदला भारत
महात्मा गांधी के 125वीं जयंती पर देश ने उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में पुष्पांजलि दी थी और गांधी जी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार होते देश ने करीब 100 साल बाद देखा. पंडित नेहरू को आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर ऐसे समय काल में काम करने का मौका मिला था जहां नीतियां बनाने और लागू करने की कोई चुनौती नहीं थी, लेकिन नरेंद्र मोदी का कार्यकाल राजनीतिक और सामाजिक तौर पर काफी उथल-पुथल वाला रहा हैं जहाँ अस्थिर सरकारें और अनिश्चितता से भरे सियासी माहौल में स्थिर सरकार देने के साथ-साथ रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म काफी दुष्कर कार्य हैं. मोदी ने सोच बदलेगा तो देश बदलेगा की नीति पर चलकर अपनी क्षमता को साबित कर रहे हैं.
आखिर मोदी की लोकप्रियता और इनके लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतने का मंत्र इनका जनसरोकार का कार्य हैं. मोदी ने इस देश के करोड़ों गरीब लोगों के सपने को हकीकत बनाया हैं. 42 करोड़ लोगों को पहली बार बैंक में खाता खोलवाने के साथ ही सरकारी सहायता सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचाया हैं. घरों में शौचालय, रसोई में गैस चूल्हा के साथ ही एलपीजी गैस , नल से जल, हर घर बिजली, पक्का घर सहित अनेकों सरकार की ऐसी योजना जिससे समाज में करोड़ों लोगों की ज़िन्दगी और सामाजिक हैसियत बदल गई हैं. 2014 से पहले जो सुविधा एक ख़ास वर्ग के लिए ही उपलध होती थी और समाज के कुछ लोग ही उठाते थे वो सारी सुविधाएं गांव और शहर के गरीब और अमीर वर्ग तक एकसमान रूप से पहुंच रही हैं. आमजन के जीवन में यह बदलाव भारत की जनता से मोदी को सीधे तौर पर जोड़ रही हैं.
सेवा और संवेदना से बनी मोदी की पहचान
मोदी ने पंडित नेहरू की तरह चाचा नेहरू की छवि नहीं बनाई बल्कि आम लोगों को अपने घर के सदस्य होने का एहसास करवाया हैं. प्रयागराज के स्वच्छ कुंभ में सफाईकर्मियों के पैर धोते हुए मोदी या फिर श्रमिकों के साथ भोजन करते हुए मोदी को देखकर देश की जनता को मोदी में अपनी तस्वीर नज़र आ रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने जवाहरलाल नेहरू की तरह परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया हैं. नेहरू ने अपने जीवनकाल में अपनी पुत्री इंदिरा गांधी को 1959 में दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के विशेष अधिवेशन में पार्टी का अध्यक्ष बनवा दिया था. नेहरू ने यह पद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद पर अपना उत्तराधिकारी बनाने के लिए ही किया था.

















