उपकारिषु यः साधुः साधुत्वे तस्य को गुणः
अपकारिषु यः साधुः सः साधु सद्भिरुच्यते ॥२ ॥
हिन्दी अर्थ-
उपकारी व्यक्तियों के साथ जो सज्जनता का व्यवहार करते हैं, उनक सज्जनता का क्या वैशिष्ट्य है ? वस्तुतः अपकार करने वाले के साथ ज सज्जनता का व्यवहार करते हैं? विद्वान उसे ही ‘साधु’ (सज्जन) म्नीका करते हैं।













