मोदी सरकार में सरहदों की अभेद्य सुरक्षा; सीमा विकास को लेकर पूरी तरह बदली सोच!
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मोदी सरकार में सरहदों की अभेद्य सुरक्षा: BRO का बजट ₹18,700 करोड़ पहुंचा, जानिए कैसे सीमा विकास की बदली सोच

मोदी सरकार के 'राष्ट्र प्रथम' संकल्प से भारत की सरहदों की नियति बदल गई है। 2014 तक महज ₹3,000 करोड़ रहने वाले सीमा सड़क संगठन (BRO) का बजट वर्ष 2025-26 के लिए ₹18,700 करोड़ किए जाने और सीमा विकास की पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट पढ़ें।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by Shivam Dixit
Jun 7, 2026, 09:18 pm IST
inभारत, रक्षा, विश्लेषण, मत अभिमत
Modi Govt Border Security BRO Budget Infrastructure Development

किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता उसकी सरहदों की मजबूती पर निर्भर करती है। दुर्भाग्यवश, दशकों तक हमारे देश की सरहदों ने एक ऐसी बेबसी देखी थी, जहां सड़कें भी उपलब्ध नहीं थीं। साल 2014 से पहले हमारे देश के सीमावर्ती क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार थे।

बर्फबारी के मौसम में महीनों तक हमारे देश की सरहदों में संपर्कहीनता की स्थिति बनी रहना मजबूरी थी। सेना को रसद के लिए केवल एयरलिफ्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन 2014 में एक नए युग की शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “राष्ट्र प्रथम” के संकल्प ने भारत की सरहदों की नियति ही बदल दी है।

सीमा विकास को लेकर बदली सोच

इतिहास गवाह है कि पिछली सरकारों की नीति यह थी कि सीमा पर बुनियादी ढांचा विकसित न करना ही सुरक्षा की गारंटी है, जिससे दुश्मन देश के अंदर प्रवेश न कर सके। लेकिन मोदी सरकार ने इस रक्षात्मक और कमजोर सोच को पूरी तरह बदलते हुए जड़ से उखाड़ फेंका है।

आंकड़ों के अनुसार इस ऐतिहासिक परिवर्तन को देखें तो पाते हैं कि साल 2014 तक सीमा सड़क संगठन का बजट महज ₹3,000 करोड़ के आसपास होता था। वर्तमान मोदी सरकार ने वर्ष 2024-25 में इसे लगभग पांच गुना बढ़ाकर ₹16,690 करोड़ से भी अधिक कर दिया है। वहीं 2025-26 के लिए सीमा सड़क संगठन का बजट ₹18,700 करोड़ निर्धारित किया गया है।

पहले सड़कों के निर्माण की गति मात्र 600 किलोमीटर प्रतिवर्ष थी, जो वर्तमान सरकार की कार्यकुशलता ने लगभग दोगुना करते हुए 1,100 किलोमीटर प्रतिवर्ष से भी अधिक कर दी है। इसी कालखंड में सीमा सड़क संगठन ने 1,100 से अधिक रणनीतिक पुलों का निर्माण कर दुर्गम क्षेत्रों को सुगम बनाया है। यह मोदी सरकार की देश के प्रति समर्पण और इच्छाशक्ति है, जिसने असंभव को संभव कर दिखाया है।

सुरंगों और आधुनिक आधारभूत संरचना का विस्तार

मोदी सरकार की यह प्रथम रणनीति रही है कि हर मौसम में निर्बाध संपर्क बना रहे। पहले ऊंचे दर्रे भारी बर्फबारी के कारण साल में छह महीने बंद रहते थे। अब इन इलाकों में आधुनिक इंजीनियरिंग के चमत्कार यानी सुरंगों का जाल बिछ चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट अटल सुरंग आज मनाली से लेह की दूरी को 46 किलोमीटर और यात्रा समय को 5 घंटे कम कर चुका है, जो दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब हाईवे टनल है।

इसी कड़ी में 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची सेला टनल भारतीय सेना को अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र से चीन सीमा तक साल के 365 दिन निर्बाध पहुंच प्रदान कर रही है। इस परिवर्तन के बाद भारी तोपें, टी-90 भीष्म टैंक और आधुनिक सैन्य साजो-सामान बिना किसी मौसम की बाधा के मिनटों में सीमा तक पहुंच रहे हैं।

यह भारत की वह रणनीतिक शक्ति है, जिससे आज दुश्मन के हौसले पस्त हो रहे हैं।

पूर्वोत्तर भारत में रणनीतिक विकास

उत्तर-पूर्व भारत, जिसे कभी दिल्ली की सत्ता से बहुत दूर और अलग-थलग माना जाता था, अब प्रधानमंत्री मोदी जी की “एक्ट ईस्ट” नीति का सबसे सशक्त केंद्र बन चुका है। अरुणाचल प्रदेश से लेकर सिक्किम तक रणनीतिक सड़कों का ऐसा जाल बिछाया गया है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

बोगीबील जैसे विशाल पुलों ने ब्रह्मपुत्र के दोनों छोरों को जोड़कर सेना की आवाजाही को नई रफ्तार और मारक क्षमता प्रदान की है। वर्तमान में अरुणाचल के उन सुदूर कोनों तक भी हमारा तिरंगा और हमारी सेना मजबूती से तैनात है, जहां पहले पहुंचना लगभग असंभव था।

मोदी सरकार ने उन दुर्गम पहाड़ियों के बीच विकास और सुरक्षा का अटूट रास्ता बना दिया है।

बहु-स्तरीय कनेक्टिविटी और सैन्य तैयारी

युद्ध जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में किसी एक रास्ते पर निर्भरता घातक साबित हो सकती है और इसी जोखिम को समझते हुए मोदी सरकार ने बहु-स्तरीय कनेक्टिविटी का जाल बिछाया है।

आज कई वैकल्पिक मार्ग और सैकड़ों बहु-स्तरीय पुलों का निर्माण किया गया है, जो भारी-भरकम टैंकों और सैन्य वाहनों का भार आसानी से झेल सकते हैं। इसके साथ ही सीमा के पास दर्जनों उन्नत लैंडिंग ग्राउंड और हवाई क्षेत्रों को युद्ध स्तर पर पुनर्जीवित किया गया है।

इन ठोस प्रयासों के कारण आज भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता और प्रतिक्रिया समय कई गुना तेज हो गया है, जिससे हमारी सीमाएं पूर्णतः अभेद्य बन गई हैं। इस कारण अब दुश्मन भारत की ओर आंख दिखाने का साहस भी नहीं जुटा पा रहा है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और सीमावर्ती गांवों का विकास

वर्तमान सरकार का स्पष्ट मानना है कि सीमाओं की रक्षा केवल सेना के हथियारों से नहीं होती, बल्कि वहां रहने वाला नागरिक देश की पहली सुरक्षा पंक्ति होता है।

इसी दूरदर्शी सोच के तहत वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की शुरुआत की गई, जिसके तहत सैकड़ों सीमावर्ती गांवों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ा जा रहा है। जहां पहले बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पलायन होता था, आज वहां आधुनिक सड़कें, संचार सुविधाएं और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

जब हमारे सीमावर्ती गांव सशक्त और समृद्ध होंगे, तो भारत की सुरक्षा का कवच और भी अभेद्य और अडिग होता जाएगा।

अभेद्य भारत का अटूट संकल्प

सीमा पर बन रही चौड़ी सड़कें, गहरी सुरंगें और मजबूत पुल केवल कंक्रीट और स्टील का निर्माण नहीं हैं, बल्कि यह वर्तमान केंद्र सरकार के अभेद्य भारत का अटूट संकल्प हैं।

350 से अधिक बड़ी आधारभूत संरचनाओं ने भारत की सीमाओं को एक ऐसा सुरक्षा कवच पहना दिया है, जिसका सामना करने का साहस कोई भी दुश्मन नहीं कर सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा। वर्तमान में हमारी सीमाएं न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता और गौरवशाली भारत की नई इबारत भी लिख रही हैं।

Topics: India Border Security AnalysisPM Modi Rashtra Pratham ResolutionNational Sovereignty IndiaModi Govt Border InfrastructureBorder Road Organisation BRO Budget
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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