उत्तर प्रदेश

“मानवता को भारत के जीवन-दर्शन और मूल्यों की आवश्यकता”- अरुण जैन

सिद्धार्थनगर (गोरखपुर) में RSS गोरक्ष प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का समापन। अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन ने 'विश्व बंधुत्व' पर दिया जोर।

Published by
Shivam Dixit



सिद्धार्थनगर/गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) गोरक्ष प्रांत के 15 दिवसीय ‘संघ शिक्षा वर्ग एवं घोष वर्ग’ का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस विशेष प्रशिक्षण वर्ग में 300 स्वयंसेवकों ने राष्ट्र निर्माण और संगठन कौशल का अपना कठोर प्रशिक्षण पूर्ण किया।

“हिन्दू समाज की संगठित शक्ति से ही होगा राष्ट्र का उद्धार”

समापन समारोह को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन जी ने स्वयंसेवकों और समाज का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि संघ ने एक ऐसी अनूठी कार्यपद्धति विकसित की है, जिसके माध्यम से विविधताओं से भरे विशाल हिन्दू समाज को एक सूत्र में पिरोया जा सके।

 

“हिन्दू समाज की संगठित शक्ति द्वारा ही भारत राष्ट्र का उद्धार होगा। ‘विश्व बंधुत्व’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ भारत की मूल भावना है। ऐसे में हमें खुद को तैयार करने की गति को और अधिक तेज करनी होगी।”
– अरुण जैन जी

विश्व के असंतुलित विकास और भारत की भूमिका

श्री अरुण जैन जी ने अपने उद्बोधन में वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भारतीय दर्शन ही विश्व को सही दिशा दिखा सकता है।

  • वैश्विक संकट: वर्तमान विश्व गहरे संघर्ष, आपसी स्वार्थ और असंतुलित विकास की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।
  • भारत की आवश्यकता: ऐसे संकट के समय में पूरी मानवता को भारत के जीवन-दर्शन और शाश्वत मूल्यों की नितांत आवश्यकता है।
  • संघ को समझें: उन्होंने समाज से विशेष आह्वान किया कि वे संघ को केवल दूर से देखने या मात्र दर्शक बने रहने की बजाय, इसके भीतर आएं और इसकी कार्यपद्धति व विचारों को गहराई से समझें।

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