आज के समय में सोशल मीडिया लोगों तक जानकारी पहुंचाने का सबसे तेज माध्यम बन गया है। लेकिन कई बार इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल झूठी खबरें फैलाने और लोगों को गुमराह करने के लिए भी किया जाता है। हाल ही में वंदे भारत ट्रेनों को लेकर सामने आए एक मामले ने यही सवाल खड़ा कर दिया है। भारतीय रेलवे का दावा है कि सोशल मीडिया पर वंदे भारत ट्रेनों के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा था, जिसके बाद रेलवे ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है।
वंदे भारत को बदनाम करने की साजिश
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वंदे भारत ट्रेनों के खाने और यात्रा अनुभव को लेकर कई शिकायतें पोस्ट की जा रही थीं। इन पोस्टों में यात्रियों ने खाने की गुणवत्ता और सुविधाओं को खराब बताया था। शुरुआत में ये सामान्य शिकायतें लग रही थीं, लेकिन रेलवे की जांच में कुछ अलग ही तस्वीर सामने आई। रेलवे अधिकारियों ने पाया कि कई पोस्टों में एक जैसी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं, शिकायतों में लिखे गए शब्द और भाषा भी लगभग एक जैसी थी। केवल ट्रेन का नाम और उसका रूट बदल दिया गया था। इससे रेलवे को शक हुआ कि यह कोई सामान्य शिकायत नहीं, बल्कि जानबूझकर चलाया गया अभियान हो सकता है।
रेलवे का कहना है कि किसी यात्री को अगर सफर के दौरान कोई परेशानी होती है तो उसे शिकायत करने का पूरा अधिकार है। लेकिन झूठी जानकारी फैलाकर लोगों को भ्रमित करना गलत है। ऐसी फर्जी पोस्टों से यात्रियों के बीच गलत संदेश जाता है और रेलवे की छवि को नुकसान पहुंचता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन पोस्टों के पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था। रेलवे ने लोगों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को बिना जांचे-परखे साझा न करें। आज के डिजिटल दौर में हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह केवल सही और भरोसेमंद जानकारी पर ही विश्वास करे। रेलवे का साफ कहना है कि फर्जी खबरें फैलाने और यात्रियों को गुमराह करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













