विश्व

फ्रांसीसी महिला से गैंगरेप मामले में आबिद-शफाकत को फांसी की सजा

लाहौर मोटरवे गैंगरेप मामले में 5 साल बाद लाहौर हाईकोर्ट ने आबिद अली और शफकत अली की फांसी की सजा बरकरार रखी। 2020 में फ्रांसीसी महिला के साथ उसके बच्चों के सामने हुई घटना पर एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी।

Published by
कुलदीप सिंह

पाकिस्तान में फ्रांस की महिला के साथ उसी के बच्चों के सामने बंदूक की नोक पर गैंगरेप की घटना के 5 साल के बाद लाहौर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। 2020 के लाहौर मोटरवे गैंगरेप के दो दोषियों आबिद अली और शफकत अली की फांसी की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। दोनों ने 2021 में आतंकवाद निरोधी अदालत (ATC) की दी गई मौत की सजा के खिलाफ अपील की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब निचली अदालत की सजा लागू रहेगी। इस मामले पर एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी है।

क्या था लाहौर मोटरवे केस?

9 सितंबर 2020 की की रात थी। पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट से लाहौर जा रही थी। मोटरवे पर उनकी कार का पेट्रोल खत्म हो गया और वे सड़क किनारे रुक गए। महिला बच्चों के साथ कार के अंदर दरवाजे बंद करके मदद का इंतजार कर रही थी। तभी कुछ लोगों ने कार की खिड़की तोड़ दी और महिला को जबरन बाहर निकाल लिया। उन्होंने बंदूक दिखाकर, उसी के बच्चों के सामने महिला के साथ गैंगरेप किया। इसके बाद वे भागते समय परिवार के पैसे, गहने और बैंक कार्ड भी ले गए।

इस घटना के बाद पाकिस्तान में काफी विरोध प्रदर्शन हुए। लोग महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की मांग करने लगे। उस समय लाहौर के पुलिस प्रमुख उमर शेख ने महिला पर ही सवाल उठाया था कि वह रात में यात्रा क्यों कर रही थी और उसे दूसरा रास्ता चुनना चाहिए था।

दोषियों को कैसे पकड़ा गया?

पहले तो पुलिस ने इसे दबाने की कोशिश की, लेकिन मामला बढ़ने पर आधिकारी पर जांच शुरू हुई। जांच टीम ने मोबाइल फोन के डेटा और लोकेशन की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। क्राइम सीन से लिए गए डीएनए सैंपल से भी उनकी पुष्टि हुई। पीड़िता ने कोर्ट में दोनों को पहचाना। शफकत अली ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना अपराध कबूल भी लिया।

मार्च 2021 में आतंकवाद निरोधी अदालत ने दोनों को गैंगरेप, अपहरण, डकैती और आतंकवाद संबंधी अपराधों का दोषी माना। अदालत ने उन्हें फांसी की सजा के साथ उम्रकैद और अन्य सजाएं भी दीं।

उच्च न्यायालय में क्या हुआ?

अपील में दोषियों के वकीलों ने कहा कि केस में कई कमजोरियां हैं, सबूत भरोसेमंद नहीं हैं और सजा रद्द की जाए। लेकिन सरकारी वकीलों ने डीएनए और मोबाइल लोकेशन जैसे मजबूत सबूत पेश किए। उन्होंने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने हर सबूत की अच्छी जांच के बाद ही फैसला लिया था। लाहौर हाई कोर्ट ने सरकारी पक्ष को सही माना और दोनों दोषियों की अपील खारिज कर दी। उनकी फांसी की सजा बरकरार हलेरखी गई।

मस्क और ब्रिटिश सांसद का रिएक्शन

ब्रिटेन के सांसद रूपर्ट लोव ने इस खबर को शेयर करते हुए लिखा कि पाकिस्तान से एक अच्छी खबर आई है। एलन मस्क ने इसके जवाब में लिखा — “शाबाश पाकिस्तान!” उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों को भी ऐसे हिंसक अपराधों में सख्त सजा देनी चाहिए।

Share