अट्टापदी (केरल) । नए शैक्षणिक सत्र में स्कूल खुलने के दिन डॉ. वेल्लमणि (Dr. Velmani) ने अपने ‘मातृ विद्यालय’ (Alma Mater) और उस संस्थान का दौरा किया, जिसने उनके जीवन के शुरुआती और संघर्षपूर्ण वर्षों में उन्हें पाला-पोसा।
यह भावनात्मक दौरा उन शिक्षकों, केयरटेकर्स और शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करने का अवसर था, जिन्होंने उनके जीवन को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. वेल्लमणि ने चेरपू सी.एन.एन. गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में ‘विद्यालय प्रवेशोत्सव’ (School Entrance Celebration) में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। वर्षों बाद अपने स्कूल लौटना और उन लोगों से मिलना, जिन्होंने कभी उनका मार्गदर्शन किया था, उन्हें अपार खुशी और कृतज्ञता से भर गया।
संघर्ष भरा बचपन: 5 साल की उम्र में पहुंचीं अनाथालय
वेल्लमणि अट्टापदी के चावडियूर निवासी नंचाप्पन और सेल्वी की चार संतानों में सबसे बड़ी हैं। देखभाल, सहारे और अपनी शिक्षा जारी रखने के अवसर की तलाश में, महज पांच साल की उम्र में वह पूथराक्कल अनाथालय (Pootharakkal Orphanage) आ गई थीं। उनके शुरुआती वर्ष पूथराक्कल के ‘लूर्डेस निलयम’ की देखरेख में बीते और उन्होंने पूथराक्कल तथा अम्मदाम के स्कूलों में पढ़ाई की।
दिशा बदलने वाला वह मोड़
छठी कक्षा के बाद, अट्टापदी में तत्कालीन सेवा प्रचारक डॉ. नारायणन के प्रयासों से, उन्हें ऊरकम संजीवनी समिति द्वारा संचालित ‘गर्ल्स होम’ में आश्रय मिला। यही वह जगह थी जहां उनके सपनों को नई दिशा और प्रोत्साहन मिला।
“मणिकुट्टी” और सेवा भारती का मार्गदर्शन
डॉ. वेल्लमणि ने पूर्णकालिक सेवा भारती कार्यकर्ता और वार्डन बिंदु बालकृष्णन के साथ-साथ उन कई अन्य लोगों से मिले समर्थन और मार्गदर्शन को प्यार से याद किया, जो उनके जीवन में प्रेरणा का स्रोत बने। गर्ल्स होम में सभी लोग उन्हें प्यार से “मणिकुट्टी” (Manikkutti) कहकर बुलाते थे।
वेल्लमणि ने अपनी स्कूली शिक्षा चेरपू सी.एन.एन. गर्ल्स हाई स्कूल और गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, इरिंजालकुडा से पूरी की। बाद में उन्होंने पंकजकस्तूरी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, कट्टाकडा (तिरुवनंतपुरम) से B.A.M.S. की डिग्री हासिल की।
सरकारी मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्ति
वर्ष 2018 से वेल्लमणि विभिन्न संस्थानों में अस्थायी आयुर्वेद डॉक्टर के रूप में सेवा दे रही थीं। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक महीने पहले ही उन्होंने केरल लोक सेवा आयोग (Kerala PSC) के माध्यम से स्थायी नियुक्ति हासिल की है। वर्तमान में वह नेल्लियाम्पथी (Nelliampathy) के सरकारी आयुर्वेद औषधालय में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं।
- उनके पति अरुस्वामी एक सिविल इंजीनियर हैं और अट्टापदी के ही मूल निवासी हैं।
- दंपति के दो बच्चे हैं, संजना और कार्तिक।
- डॉ. वेल्लमणि ‘विवेकानंद मेडिकल मिशन अट्टापदी ट्रस्ट’ की सक्रिय सदस्य भी हैं।
छात्रों को दिया सफलता का मंत्र
समारोह के दौरान छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए डॉ. वेल्लमणि ने जोर देकर कहा-
“जीवन में हमेशा उन लोगों को याद रखना चाहिए जो हमारे कठिन समय में हमारा समर्थन करते हैं।”
उन्होंने बच्चों को पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
एक छोटी बच्ची, जिसने कभी बच्चों के घर (चिल्ड्रन होम) में देखभाल और सुरक्षा मांगी थी, और आज एक सरकारी मेडिकल ऑफिसर के रूप में समाज की सेवा कर रही है।
डॉ. वेल्लमणि की यह यात्रा इस बात का एक प्रेरक उदाहरण है कि कैसे करुणा, सही मार्गदर्शन और अवसर किसी का भी जीवन पूरी तरह से बदल सकते हैं।











