अमेरिका अमेरिका अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह भारत के साथ व्यापारिक समझौता करना चाहता है, लेकिन इसके साथ ही वह उसके खिलाफ भी एक्शन ले रह हैं। उसी दौरान अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस (USTR) ने भारत समेत कई देशों को अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस वाला करार दिया है। इन देशों से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, USTR ने सेक्सन 301 के तहत 60 जांच पूरी कीं। इनमें पाया गया कि 54 देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे। भारत भी इन्हीं 54 देशों में शामिल है।
USTR ने क्या कहा?
USTR ने नोटिफिकेशन जारी करके साफ बताया कि जो देश जबरन मजदूरी वाले सामान पर पाबंदी लागू करते हैं, या रेसिप्रोकल ट्रेड अरेंजमेंट के तहत ऐसा करने का वादा करते हैं, या आंशिक रूप से रोक लगाते हैं – उन पर 10% एक्स्ट्रा ड्यूटी लगेगी। जो देश इनमें से कुछ भी नहीं करते, उन पर 12.5% अतिरिक्त ड्यूटी का प्रस्ताव है।
टेक्सटाइल और अपैरल के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। कुछ चुनिंदा देशों से तय मात्रा तक माल कम टैरिफ पर आने की छूट मिल सकती है। USTR ने कहा कि जांच के आधार पर आगे जरूरी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, “हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक सहयोगी जबरन मजदूरी वाले सामान को रोकने में नाकाम हैं। इससे अमेरिकी वर्कर्स को असमान मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है।”
भारत की स्थिति
अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 54 देशों में शामिल है जहां जबरन मजदूरी वाले माल पर प्रभावी पाबंदी नहीं है, ऐसा USTR का आकलन है। छह और देशों (कनाडा, इक्वाडोर, EU, इंडोनेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान) पर थोड़ा अलग नजरिया रखा गया है। वे भी मजबूर मजदूरी वाले सामान रोकने में पूरी तरह सफल नहीं माने गए।
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क्या है धारा 301 क्या है?
धारा 301 अमेरिका के व्यापार एक्ट 1974 का हिस्सा है। इसके तहत USTR दूसरे देशों की ट्रेड पॉलिसी, प्रैक्टिस और कार्रवाइयों की जांच कर सकता है। अगर कोई देश अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदायक या भेदभावपूर्ण नीति अपनाता है तो अमेरिका टैरिफ बढ़ा सकता है, ट्रेड रिस्ट्रिक्शन लगा सकता है या कोई और उपाय कर सकता है। यह पूरा मामला तब सामने आया है जब दोनों देशों के सीनियर ट्रेड अधिकारी दिल्ली में तीन दिन की मीटिंग कर रहे हैं। इसका मकसद द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाना है।
ट्रेड डील की बातचीत के बीच अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रस्तावित टैरिफ अगर लागू हुए तो भारतीय निर्यात पर असर पड़ सकता है।

















