नार्को-आतंकवाद के मुद्दे पर जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बड़ी बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नशे के कारोबार और आतंकवाद के बीच के गहरा संबंध होता है। आतंकी नशे की कमाई से ही जिंदा रहते हैं। ऐसे में अवैध नशे पर खर्च होने वाला हर रुपया आतंकी हिंसा को बढ़ावा देता है।
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान के तहत पदयात्रा से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज मैं यहां एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि आपके परिवार के एक सदस्य की तरह खड़ा हूं। एलजी ने जोर देकर कहा कि जब तक जम्मू-कश्मीर से नशे की इस बुराई को पूरी तरह खत्म नहीं कर लिया जाता, वे चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने ड्रग्स और आतंकवाद को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया।
ड्रग्स आतंकवाद की आर्थिक रीढ़
मनोज सिन्हा के अनुसार, नशीले पदार्थों के व्यापार को रोककर आतंकवादी नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ को तोड़ा जा सकता है। नार्को-आतंकवाद का मकड़जाल युवाओं को नुकसान पहुंचा रहा है और समाज को कमजोर कर रहा है।
पदयात्रा बना जनांदोलन
50-51 दिन पहले शुरू किया गया ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इसमें परिवार, युवा, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक नेता, महिला समूह, सामाजिक संगठन और आम नागरिक सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। एलजी ने कहा कि यह अभियान अब सिर्फ सरकारी विभागों या पुलिस तक सीमित नहीं है। यह हर गली, हर परिवार और हर व्यक्ति को जोड़ने वाला सामाजिक आंदोलन बन गया है। लोगों का संघर्ष और सपना एक सुरक्षित, नशा-मुक्त जम्मू-कश्मीर का है।
आतंकवाद और नशे का लंबा इतिहास
जम्मू-कश्मीर ने दशकों तक आतंकवाद और हिंसा का दर्द सहा है। राष्ट्र-विरोधी ताकतें युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करती रही हैं। साथ ही नशे की लत ने भी युवा पीढ़ी को जाल में फंसाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2020 के ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के बाद 2021 से यहां नशा विरोधी काम तेज किए गए।
अभियान के आंकड़े
नशा मुक्त जम्मू कश्मीर अभियान के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाते हैं कि 50 दिन के इस अभियान में 923 नशा तस्करों पर FIR दर्ज हुई है। इस दौरान 1000 से अधिक को गिरफ्तार किया गया है औऱ 56 बड़े तस्करों को एहतियात बरतते हुए हिरासत में लिया गया है। वहीं 600 से अधिक लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। जबकि 124 पासपोर्ट को निरस्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
युवाओं को अपराधी नहीं, पीड़ित मानें
उपराज्यपाल ने नशे के शिकार युवाओं को अपराधी न मानते हुए उन्हें पीड़ित बताया। उन्होंने कहा कि इन युवाओं को सम्मान, संवेदना और देखभाल के साथ सहयोग दिया जाना चाहिए।
हर जिले में बनेंगे पुनर्वास केंद्र
एलजी ने घोषणा की कि हर जिले में आधुनिक नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी। विशेषज्ञों से सलाह लेकर पुनर्वास नीति बनाई गई है, ताकि नशे से उबर रहे लोगों को अच्छा इलाज, भावनात्मक सहारा और समाज में सम्मानजनक जगह मिल सके।

















